मैनपुरी/घिरोर। थाना करहल क्षेत्र में बारातियों की सजगता से दो वाहनों में लादी गई 87 गाय पुलिस ने बरामद कर लीं। इस दौरान वाहन चालक मौके से भाग गए। पुलिस ने जब तक गायों को मुक्त कराया तब तक 23 गाय मर गईं। पुलिस ने दोनों वाहनों को थाने में खड़ा कराया है। वाहनों पर अंकित नंबर के आधार पर पुलिस ने मालिकों की तलाश शुरू कर दी है।
घिरोर क्षेत्र के गांव घुराई निवासी अरविंद की बारात में जसवंत नगर से शामिल होकर गांव के जयब्रेश, सुमित, सौरभ, बृजमोहन और शशांक कार से रविवार की रात लौट रहे थे। थाना करहल क्षेत्र में करहल-घिरोर मार्ग पर मानिकपुर के पास सड़क के बीच खराब खड़ी डीसीएम को देख वह रुक गए। बारातियों ने जब डीसीएम में देखा तो उसमें गाय लदी थीं। इस पर उन्होंने डीसीएम चालक से पूछताछ की तो वह साथियों सहित वहां से भाग गया। उन्होंने इसकी जानकारी एसपी को दी। एसपी श्रीकांत सिंह के निर्देश पर थानाध्यक्ष करहल और कुर्रा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गए। इसी बीच करहल की ओर से आए ट्रक को पुलिस ने रोकने की कोशिश की तो चालक सहित ट्रक में सवार लोग भाग गए। पुलिस ने ट्रक की तलाशी ली तो उसमें भी गाय लदी थीं। डीसीएम पर यूपी21एएन/5835 और ट्रक पर एचआर56ए/5739 नंबर अंकित है। पुलिस ने पैर और मुंह बांधकर लादी गई गायों को जब तक मुक्त कर नीचे उतारा तब तक 23 गाय मर गईं। थानाध्यक्ष करहल जेएन सिंह दोनों वाहनों और गायों को थाना करहल ले आए। घायलों गायों का चिकित्सकों से इलाज कराया गया। मरी गायों को पोस्टमार्टम के बाद जमीन में दबा दिया गया। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर दोनों वाहनों पर अंकित नंबरों के आधार पर मालिक और चालक की तलाश शुरू कर दी है।
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चार दिन पहले भी पकड़ा था गोवंश
23 जनवरी की रात थाना घिरोर क्षेत्र में पुलिस ने ट्रॉला संख्या (यूपी81एन/3744) पकड़ा था। इसमें 100 गाय लदी थीं। उनमें भी आठ गाय मर गई थीं। ट्रॉला चालक ने थाना सैफई, करहल, बरनाहल और घिरोर पुलिस को जमकर छकाया था। बाद में पुलिस ने हेल्पर मोअज्जम अली पुत्र अकबर अली निवासी दिल्ली दरवाजा, संभल को दबोचा था। जबकि यहीं का चालक इश्त्याक खां भाग गया था।
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डीसीएम में पकड़े 25 गोवंश
करहल (ब्यूरो)। रविवार सुबह थाना क्षेत्र में उरथान मोड़ पर पुलिस ने एक डीसीएम में लदे 25 गोवंश बरामद किए थे। इस दौरान डीसीएम चालक मौके से भाग गया। डीसीएम पर यूपी17टी/2036 नंबर अंकित है। डीसीएम में 24 गाय और एक सांड़ को पैर और मुंह बांधकर लादा गया था। इनमें से छह गाय मर गईं थीं।