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नहीं बदले किरथुआ के हालात

Mainpuri Updated Sat, 21 Jun 2014 05:30 AM IST
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करहल। मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाले लोहिया गांवों के हालात अच्छे नहीं हैं। कागजों में भले ही गांवों में विकास दिख रहा हो लेकिन वास्तविकता गांव के रहने वाले ही बेहतर जानते हैं। गांव किरथुआ में न तो कोई विकास कार्य हुआ और न ही पात्रों को आवास और अन्य सुविधाएं मिल सकीं। अमर उजाला की टीम ने शुक्रवार को गांव में विकास कार्यों की जानकारी ली।
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विकास खंड करहल के ग्राम किरथुआ को वित्तीय वर्ष 2012-13 में लोहिया गांव घोषित किया गया। गांव में इसके बाद भी कोई विकास कार्य नहीं हुआ। शुक्रवार को गांव के गरीलाल छप्पर बना रहे थे। पूछने पर बताया कि आंधी में कच्चे मकान से छप्पर उड़ गया। लोहिया गांव बना था तो उम्मीद थी कि अब छत मिल जाएगी। लेकिन गांव में कोई विकास कार्य ही नहीं हुआ। वह छप्पर बनाकर पुन: कच्ची दीवारों पर रखेंगे।
झब्बूलाल कठेरिया मजदूरी कर गुजर बसर करते हैं। परिवार झोपड़ी में रहता है। झब्बूलाल का कहना था कि गांव के प्रधान न होने के चलते किरथुआ में पात्रों को किसी योजना का लाभ नहीं मिला। जो विकास कार्य हुए भी हैं वह नगला अलाई और नगला दयाल में ही हुए हैं।
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नए तार नहीं लगे
जगतपाल शाक्य का कहना था कि गांव में वर्षों पूर्व विद्युतीकरण हुआ था। नए तार डाले जाने के नाम पर रवींद्र के मकान के समीप गली में से तार हटा लिए गए। नए तार तो नहीं पड़े लोगोें को बिजली उपयोग में परेशानी जरूर हो गई।

दो माह से हैंडपंप खराब
गांव के बाबूराम वाल्मीकि के मकान के समीप लगा हैंडपंप दो माह से खराब है। बाबूराम के अनुसार कई बार हैंडपंप सही कराने की मांग की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। गर्मी में काफी दूर से पानी लाना पड़ रहा है।

अधिकांश गलियों में दलदल
गांव किरथुआ में लोहिया होने के बाद भी एक भी सीसी रोड नहीं है। वर्षों पुराने खड़जों पर जल निकासी की व्यवस्था न होने के चलते दलदल के हालात बने हुए हैं।
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