मैनपुरी। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर देश को आजादी मिलने तक जिले में अंग्रेजों के खिलाफ क्रांति की आग धधकती रही। देश की आजादी के लिए महान क्रांतिकारी गेंदालाल दीक्षित द्वारा गठित मातृवेदी संस्था का मैनपुरी मुख्यालय रहा। आर्य समाज मंदिर क्रांतिकारियों का प्रमुख केंद्र था। सिद्धगोपाल चतुर्वेदी और शिवकृष्ण ने भी मातृवेदी से जुड़कर अंग्रेजों के खिलाफ जंग छेड़ी थी।
बरनाहल क्षेत्र के ग्राम चंदीकरा में वर्ष 1897 में जन्मे सिद्धगोपाल चतुर्वेदी के मन में विद्यार्थी जीवन से ही देश प्रेम की हिलोरें लेने लगी थीं। वर्ष 1915 में मिशन स्कूल के छात्रों को संगठित कर उन्होंने एक क्रांतिकारी संगठन खड़ा किया। मिशन स्कूल में जब कुछ छात्रों द्वारा मस्तक पर चंदन का टीका लगाकर आने पर शिक्षकों ने आपत्ति जताकर छात्रों की पिटाई की तो सिद्धगोपाल चतुर्वेदी ने इसका विरोध किया और पढ़ाई का बहिष्कार कराया। उनके नेतृत्व में मिशन स्कूल अंग्रेज विरोधी क्रांतिकारियों का मुख्य केंद्र बन गया था। जबकि आर्य समाज मंदिर में बैठक कर देश को आजाद कराने की रणनीति बनाई जाती थी। सिद्धगोपाल और उनके साथी मातृवेदी संगठन से जुड़ गए। मैनपुरी षड्यंत्र का भंडाफोड़ होने के बाद सिद्धगोपाल चतुर्वेदी भी अन्य छात्र क्रांतिकारियों के साथ गिरफ्तार कर लिए गए। उन्हें पांच साल की सख्त सजा सुनाई गई।
वहीं बरनाहल में वर्ष 1896 में जन्मे शिवकृष्ण मिशन स्कूल में पढ़ने के दौरान पंडित राम प्रसाद विस्मिल, गेंदालाल दीक्षित, दम्मीलाल, प्रताप सिंह राणा, कढ़ोरीलाल गुप्ता जैसे क्रांतिकारियों के संपर्क में आए। इसके बाद वह देश की आजादी के लिए गठित संगठन मातृवेदी से जुड़ गए। शिवकृष्ण गुप्तचर और भेष बदलने में माहिर थे। मातृवेदी संगठन का सदस्य दलपति अंग्रेजों का मुखबिर बन गया और उसने दिसंबर 1918 में संगठन का भंडाफोड़ कर कई क्रांतिकारियों को गिरफ्तार करवा दिया। शिवकृष्ण को भी रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। अंग्रेज जज किश की अदालत में मुकद्दमा चलाने की तैयारी चल ही रही थी कि शिवकृष्ण आरी से जेल के जंगले काटकर फरार हो गए। अंग्रेज अधिकारियों ने उन्हें जिंदा या मुर्दा लाने वाले को 500 रुपये देने की घोषणा कर दी। जेल से निकल जाने के बाद से आज तक शिवकृष्ण का कोई अता-पता नहीं चला।
कई क्रांतिकारी आए थे मैनपुरी
क्रांतिकारी संगठन मातृवेदी के अध्यक्ष गेंदालाल दीक्षित से मिलने और अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई की योजना बनाने के लिए देश के कई क्रांतिकारी मैनपुरी आए। पंडित रामप्रसाद बिस्मिल, अस्फाकउल्ला खां, मन्मथनाथ गुप्त, मुकुंदीलाल जैसे कई क्रांतिकारी अंग्रेजों के खिलाफ जंग की रणनीति बनाए यहां कई बार आए।
नजरिया आजाद भारत का
देश को आजाद कराने के लिए तमाम सुख सुविधाएं छोड़ क्रांतिकारियों ने अपना सब कुछ निछावर कर दिया। अमर शहीदों की कुर्बानी के बल पर ही हम आजादी की हवा में सांस ले रहे हैं। ऐसे में हम सबकी जिम्मेदारी बनती है कि देश की आजादी पर आंच नहीं आने दें और आजादी की वर्षगांठ को धूमधाम से मनाएं। जिन वीर बलिदानियों ने देश के लिए जान दे दी उनके बार में युवा पीढ़ी को भी जानकारी देते रहें।
- सुदर्शन लाल जैन, मोहल्ला सरावग्यान
आजादी के बाद सत्ता हासिल करने वाले नेताओं ने स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों का भारत बनाने के बारे में नहीं सोचा। जातिवाद को बढ़ावा देने वाले नेताओं ने आजादी के महत्व को कम करने का काम किया है। देश को आजाद कराने वालों को युवा पीढ़ी जानती तक नहीं है। कारण साफ है बच्चों की किताबों में ऐसे क्रांतिकारियों के पाठ ही खत्म कर दिए गए हैं। स्वाधीनता दिवस पर भी अब महज औपचारिकता पूरी की जाती है।
- जगेंद्र सिंह चौहान, भांवत रोड