मैनपुरी। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट) ने सोमवार को जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोला। करहल में तीन दिन पूर्व दो लेखपालों द्वारा एक किसान से वारिसान दर्ज करने के लिए पैसे मांगने और मना करने पर किसान की पिटाई करने के विरोध में यूनियन कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की। देरशाम डीएम से वार्ता केे बाद अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन चार दिन के लिए स्थगित कर दिया गया। डीएम ने करहल तहसील के लेखपाल प्रकरण की जांच एडीएम को सौंपी है।
सोमवार को पूर्वाह्न 11 बजे कलक्ट्रेट पर यूनियन ने किसानों के खिलाफ अन्याय और उत्पीड़न के विरोध में धरना प्रदर्शन शुरू किया। जिलाध्यक्ष तिलक सिंह राजपूत ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक अधिकारी अपने अधीनस्थों से इस कदर खौफ खाए हुए हैं कि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करने से डरते हैं। कहा कि छोटे कर्मचारी अधिकारियों को मंत्री से संबंध होने की बात कहकर मनमाने ढंग से कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि करहल तहसील में लेखपाल प्रदीप सक्सेना और अरविंद यादव किसानों का शोषण कर रहे हैं। उनसे अभद्रता करते हैं और मनमानी वसूली करते हैं। तीन दिन पूर्व एक किसान की इन दोनों ने पिटाई की थी। इसकी शिकायत के बाद भी न तो रिपोर्ट दर्ज की गई और न ही उनके खिलाफ कोई कार्रवाई की गई। उपाध्यक्ष अहिबरन सिंह ने कहा कि अधिकारी और कर्मचारी खुलेआम भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। उदयवीर सिंह यादव ने कहा कि लेखपाल बिना पैसे के आय, जाति, मूल निवास, दाखिल खारिज, वारिसान आदि की आख्या तक नहीं देते।
शाम लगभग साढ़े छह बजे डीएम से वार्ता के बाद अनिश्चितकालीन धरने को चार दिन के लिए स्थगित कर दिया गया। जिलाध्यक्ष राजपूत ने बताया कि डीएम ने करहल के लेखपाल प्रकरण की जांच एडीएम से कराने की बात कही है। संगठन की अन्य मांगों को पूरा कराने का भी आश्वासन दिया है। यदि 26 सितंबर तक कार्रवाई नहीं हुई तो फिर धरना शुरू किया जाएगा। धरना प्रदर्शन को चरन सिंह यादव, रामाधार यादव, राजा ठाकुर, योगेंद्र प्रसाद दुबे, राधेश्याम शाक्य, हरिओम, सियाराम शाक्य, रामप्रकाश, रूपेंद्र शुक्ला, दम्मीलाल फौजी आदि ने संबोधित किया।