मथुरा। गोवर्धन नगर पंचायत के नगर पालिका बनने में एनओसी का रोड़ा अटक गया है। नगर पंचायत के सीमा विस्तार के लिए गोवर्धन परिक्रमा मार्ग से जुड़ी ग्राम पंचायतों की एनओसी मांगी गई है। लेकिन ये ग्राम पंचायतें एनओसी में आनाकानी कर रही हैं। गोवर्धन नगर पंचायत का सीमा विस्तार होने के बाद इसे नगर पालिका का दर्जा दे दिया जाएगा। वर्तमान में भी गोवर्धन मतदाताओं के हिसाब से जिले की सबसे बड़ी नगर पंचायत है।
वृंदावन प्रोजेक्ट के बाद राज्य सरकार की विकास लिस्ट में गोवर्धन परिक्रमा मार्ग का नाम शामिल है। राज्य सरकार ने कई योजनाओं की रूपरेखा भी तैयार कर ली है। योजनाओं को क्रियान्वित करने की दिशा में राज्य सरकार गोवर्धन नगर पंचायत का सीमा विस्तार करने जा रही है। प्रस्ताव जिला प्रशासन की ओर से शासन को भेजा जा चुका है।
प्रस्ताव लेकर सिटी मजिस्ट्रेट 29 जून को लखनऊ गए थे। अब शासन ने डीएम से चार बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी है। इसमें नगर पंचायत गोवर्धन की सीमा में शामिल करने के लिए प्रस्तावित की गईं ग्राम पंचायतों की एनओसी, गांव के खसरा नंबर का दिशावार विवरण, आय का विवरण और नगर पंचायत बनने का गजट शामिल है। डेढ़ माह से अधिक समय बीत चुका है लेकिन रिपोर्ट अब तक तैयार नहीं हो सकी है। रिपोर्ट में सबसे बड़ी बाधा सात ग्राम पंचायतों की एनओसी है। एडीएम सदर और डीपीआरओ ये एनओसी अब तक हासिल नहीं कर सके हैं। इसके चलते गोवर्धन नगर पंचायत का सीमा विस्तार का प्रस्ताव लटक गया है।
इन ग्राम पंचायतों से लेनी हैं एनओसी
सात ग्राम पंचायतों की एनओसी ली जानी है। इनमें छह ग्राम पंचायत गोवर्धन क्षेत्र की हैं, सकीतरा, जमुनावता, गोवर्धन ब्राह्मणान, आन्यौर, जतीपुरा, गोवर्धन। एक ग्राम पंचायत राधाकुंड जेडे राधाकुंड नगर पंचायत से जुड़ी हुई है।
नगर पंचायत का हिस्सा बन जाएगा परिक्रमा मार्ग
मथुरा। प्रस्तावित सीमा विस्तार के बाद सात कोसीय गोवर्धन परिक्रमा मार्ग का अधिकांश हिस्सा गोवर्धन नगर पंचायत का हिस्सा हो जाएगा। इससे वहां विकास की संभावनाएं बढ़ेंगी। परिक्रमार्थियों के प्रति नगर पंचायत की जिम्मेदारी भी बढे़गी।