प्रतिबंधित आतंकी संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) ने अलीगढ़, आगरा और मथुरा के साथ प्रदेश के बीस जनपदों में गहरी जड़ें जमा ली थीं। बेरोजगार नौजवानों को धर्म के नाम पर बरगलाकर जोड़ा जाता था। जो भी नया सदस्य बनता था उन्हें उम्रकैद की सजा पाए नागौरी की भड़काऊ तकरीर सुनाई जाती थी।
यूं तो सिमी पर 2001 में प्रतिबंध लग गया था लेकिन आज भी इस आतंकी संगठन का नेटवर्क कायम है। समय-समय पर सिमी के सदस्य गिरफ्तार भी होते रहे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस संगठन ने तंग इलाकों में अपनी जगह बना ली थी। कैंप लगाकर नए सदस्य बनाए जाते थे। हर सदस्य को नागौरी की तकरीर सुनाई जाती थी। कुछ साहित्य भी उसे दिया जाता था ताकि उसका ब्रेन वॉश किया जा सके। ट्रेनिंग भी दिलाई जाती थी।
पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह का कहना है कि अलीगढ़, आगरा, मथुरा, हाथरस, कानपुर, बहराइच, आजमगढ़, गोंडा, बस्ती, फैजाबाद, कानपुर, बरेली, मुरादाबाद, संभल, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बुलंदशहर और एनसीआर के करीब वाले जनपदों समेत बीस जिलों में यह संगठन सक्रिय था।
पूर्व डीजीपी ने बताया कि एक बार सफदर हुसैन नागौरी कानपुर में एक कार्यक्रम में आया था। उस वक्त उसने भड़काऊ तकरीर दी थी। जब तक पुलिस पहुंची वह वहां से भाग चुका था। जब वह डीजीपी थे तब तक इस संगठन के सक्रिय होने की खुफिया रिपोर्ट आती रही थीं। सिमी के जो मुख्य लोग थे वह दूसरे संगठनों में भी चले गए थे।
मथुरा में पकड़ा गया था बड़ा नेटवर्क
सिमी का मथुरा में भी बड़ा नेटवर्क पकड़ा गया था। वर्ष 2000 में पुलिस को खुफिया एजेंसियों से जानकारी मिली थी कि सिमी के सदस्य यहां सक्रिय हो रहे हैं। श्रीकृष्ण जन्मभूमि के आसपास आपत्तिजनक पोस्टर लगा दिए गए थे। जहरीले पर्चों का वितरण भी किया गया था। लेकिन पुलिस किसी की गिरफ्तारी कर नहीं पाई थी। फरह में 1998 में गिरफ्तारियां हुई थी। उस वक्त कई लोगों के नाम प्रकाश में आए थे। जिस मकान में यह लोग रह रहे थे वहां से सेना के नक्शे पकड़े गए थे। कई दूसरे संदिग्ध दस्तावेज भी बरामद किए गए थे। एक व्यक्ति तो अभी तक जेल में है।
ट्रेन से कूदकर भाग थे सिमी के मेंबर
वर्ष 2000 में ही पुलिस को सूचना मिली थी कि सिमी के सदस्य ट्रेन से मुंबई जा रहे हैं। पुलिस ने ट्रेन को रोक लिया था। मथुरा रेलवे स्टेशन पर चेकिंग की गई थी। उस वक्त भी सिमी के सदस्य पुलिस को चकमा देकर फरार हो गए थे।