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24 घंटे मेें विलीन हो गई 50 बीघा भूमि

Mau Updated Mon, 16 Sep 2013 05:36 AM IST
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दोहरीघाट। जलस्तर में घटाव होने के बाद अब घाघरा के कटान का कहर जारी है। इससे तटवर्ती इलाके के लोगों की धड़कने बढ़ती जा रही है। जिलाधिकारी की ओर से कटान रोकने के मामले में निर्देश देने के दो दिन बाद भी कटान पीड़ितों को राहत नहीं मिल पा रही है। चिऊंटीडांड़ गांव में 24 घंटे में लगभग 50 बीघा से अधिक उपजाऊं जमीन नदी में विलीन हो गई। नदी और बंधे की दूरी मात्र 15 मीटर ही रह गई है। कटान की रफ्तार तेज होने से चिऊंटीडांड़ और धनौली रामपुर गांव का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
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घाघरा के प्रतिदिन रौद्र रूप धारण करने से अतिसंवेदनशील गांव चिऊटीडांड़ गांव तथा धनौली रामपुर गांव लीलने को नदी बेताब नजर आ रही है। चिऊंटीडांड़ गांव को प्रशासन की ओर से रेड अलर्ट घोषित किया गया है। बावजूद प्रशासन की ओर से कटान रोकने के मामले में खानापूर्ति हो रही है। जिलाधिकारी और एसपी ने 13 सितंबर को गांव का जायजा लेकर अधिकारियों को कटान रोकने का निर्देश दिया था। हालत यह है कि एक बार फिर 24 घंटे के अंदर गांव के श्यामबली, त्रिलोकी नायक, किशुन नायक, रामविलास नायक, झुन्नू यादव, गिरजा, महेश, रामजनम, धरमू, हरिशंकर आदि की 50 बीघा से अधिक उपजाऊ जमीन नदी में विलीन हो गई। नदी और बंधे की दूरी मात्र 15 मीटर रह गई है। उधर धनौली रामपुर के सामने नागा बाबा की कुटी के उत्तर भीषण कटान के चलते स्थिति गंभीर नजर आ रही है। कटान का दायरा मुक्तिधाम तक पहुंच गया है। ग्रामीणों के अनुसार कटान की रफ्तार यही रही तो बंधा को भी लील सकती है। क्षेत्र के परमहंस राय, रामबचन राय, मकसूदन राय, उमाकांत राय, रामनिवास राय, रामजी राय, प्रजापति राय, फूल्लन राय और ओमप्रकाश राय का कहना था कि शासन प्रशासन के गैर जिम्मेदाराना रवैए से हर रोज किसान भूमिहीन होते जा रहे हैं। अब तक सैकड़ों एकड़ भूमि नदी में विलीन हो चुकी है। लेकिन किसी ने किसानों की सुध लेने की जहमत तक नहीं उठाई है।

दो सीमाओं के बीच पिस रहे चिऊटीडांड़ गांव के लोग
चिऊटीडांड़ गांव मऊ और आजमगढ़ की सीमाओं के बीच पिस रहा है। चिऊटीडांड़ गांव दो बंधों के बीच बसा है। चिऊटीडांड़ गांव मऊ में पड़ता है। और गांव को नदी से बचाने की जिम्मेदारी सिंचाई खंड आजमगढ़ की है। महुआ चिऊटीडांड़ रिंग बांध सिंचाई खंड आजमगढ़ में पड़ता है। सिंचाई विभाग के अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि गांव को बचाने की जिम्मेदारी सिंचाई खंड आजमगढ़ की है।
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सिंचाई खंड आजमगढ़ के सहायक अभियंता सीबी यादव का कहना था कि कटान रोकने का प्रयास जारी है। कटान स्थल पर बोल्डर गिराए जा रहे हैं।
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