घोसी। बड़ागांव शिया मोहल्ला में हजरत मोहम्मद साहब के दामाद एवं इमाम हजरत अली के शहादत दिवस पर रविवार को ताबूत और अलम का जुलूस निकाला गया।
जुलूस शिया जामा मस्जिद से हाजी कौशर के मकान से उठकर विभिन्न स्थानों से होता हुआ नीमतले पहुंचा। नीमतले अलम ताबूत का जुलूस मातम नौहाखानी करते हुए अपराह्न कर्बला में आकर समाप्त हो गया। इस अवसर पर अंजुमन सज्जादिया, अंजुमन इमामिया, अंजुमन मासुमिया कदीम, अंजुमन दस्ते मासुमिया ने नौहाख्वानी और सीनाजनी किया। नौहाख्वानी के दौरान ‘इबभने मुल्जिम तेरी तलवार से क्या होता जाता है अली के खून से रंगीन मुसल्ला होता जाता है’ यह पढ़ा गया। इस मौके पर मौलाना नासीमुल हसन ने तकरीर में कहा कि हजरत अली का जीवन कौम और दीन के लिए समर्पित रहा। इनके हुकूमत में जनता सुखचैन से थी। कोई भूखा नहीं रहता था। इसी से परेशान होकर नमाज पढ़ते समय कौम के दुश्मनों ने इनके ऊपर पीछे से वार कर दिया। कुछ दिनों बाद इनकी मौत हो गई। इनका जीवन मानवता के कल्याण के लिए समर्पित रहा। इस दौरान शमीम हैदर,अजहर हुसैन, गमखार हुसैन, इश्तयाक सेठ आदि थे।