मऊ। स्वयंसेवी संस्था नेफोर्ड के तत्वावधान में कृषक जागरूकता अभियान के अंतर्गत बीज अनुसंधान निदेशालय कुशमौर के सभागार में प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें फसल प्रजातियों के संरक्षण के संबंध में अनेक विशेष अधिकारों पर चर्चा की गई।
कार्यशाला में मऊ, आजमगढ़, बलिया और गाजीपुर के 150 से अधिक किसान शामिल हुए। नेफोर्ड के निदेशक डा. रामकठिन सिंह ने कहा कि लगभग चार दशक पूर्व अपने प्रदेश में ही लगभग 40 से ऊपर बहुचर्चित धान की सुगंधित प्रजातियां उगाई जाती थी। इनमें से काला नमक, तिलक, चंदन, बादशाह पसंद और लालमति के अतिरिक्त लगभग सभी प्रजातियां विलुप्त हो चुकी हैं। इससे किसानों को ऐसी प्रजातियों का उपयोग करने वाले व्यक्ति अथवा बीज कंपनी को उनसे होने वाले लाभ का हिस्सा चुकाना पड़ेगा। बीज अनुसंधान निदेशालय के निदेशक डा. एस राजेंद्र प्रसाद ने हजारों वर्षों से देसी प्रजातियों को संरक्षित करने वाले किसानों को धन्यवाद देते हुए कहा कि आज भी कुछ ऐसी देशी प्रजातियां बची हैं, जिनका उपयोग नई-नई प्रजातियों को विकसित करने में की जा रही है। निदेशालय के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. अरविंद नाथ सिंह ने अधिनियम के नियमों और प्रावधानों की चर्चा करते हुए बताया कि किसान किस्मों के संरक्षण और पंजीकरण के लिए शोध संस्थानों से मदद ले सकते हैं। अधिनियम से संबंधित एक पोस्टर प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इसमें किसानों ने बीज अनुसंधान निदेशालय के प्रक्षेत्र पर लगाई गई गेहूं, चना, सरसों आदि की तमाम उन्नतिशील प्रजातियों का अवलोकन किया। प्रशिक्षण में बीज अनुसंधान निदेशालय, सूक्ष्म जीवी संस्थान कुशमौर, कृषि विज्ञान केंद्र आदि के वैज्ञानिकों ने भाग लिया। अंत में नेफोर्ड सांस्कृतिक मंच के अध्यक्ष सचिंद्र सिंह ने किसानों और वैज्ञानिकों के प्रति आभार प्रकट किया। इस दौरान मुख्य रूप से विजयशंकर पांडेय, अशोक यादव, जोखू सिंह, रामविलास सिंह, रामप्रकाश सिंह, आगम राम आदि उपस्थित रहे। संचालन संतोष कुमार मिश्र ने किया।