महिला ऐच्छिक ब्यूरो की बैठक रविवार को सीओ मधुबन श्वेता आशुतोष की देखरेख में पुलिस लाइन में हुई। इसमें कुल 23 पारिवारिक मामले आए। 13 मामलों का निस्तारण किया गया। ऐसे में पांच दंपती सारे मतभेद भुला कर साथ रहने को राजी हुए। एक मामले में सुलह न होने पर पत्रावली अग्रिम कार्यवाही के लिए भेज दी गई। शेष मामलों में बैठक की अगली तिथि पांच मई तय करपक्षकारों को नोटिस भेजने का निर्देश दिया गया।
ऐच्छिक ब्यूरो मेें प्रेमशीला- संजय कुमार, अशोक-गुडिया, रितु-सत्यम गुप्ता, ऊषा-मनोज तथा माजिदा और इनामुल हक आपसी मतभेद भुलाकर साथरहने को तैयार हो गए। वहीं शबाना और दिलशाद, मनीषा गोड और राजबहादुर, रूफिशा खातून और मोहम्मद शाहिद, योगेश और सुनीता, सरिता और महेंद्र, शाइस्ता और नदीम अंसारी तथा सविता और राजेंद्र के मामलों में पक्षकारों की सहमति तथा मामला कोर्ट में लंबित होने के चलते पत्रावली निस्तारित कर दी गई। हसीना खातून और जलालुद्दीन के मामले में पक्षकारों के बीच समझौता न हो पाने पर पत्रावली अग्रिम कार्यवाही के लिए भेज दी गई।
अंकिता और शंकर दयाल तथा मोनिका और अंकित कुमार के मामले में पक्षकारों ने सुलह के लिए समय मांगा। वहीं अमली और संतोष, पिंकी कश्यप और मनीष कश्यप ,मंजू और रामभवन, उम्मे ऐमन और सलमान तथा हफीजुर्रहमान और इशरतजहां के मामले में एक-एक पक्ष उपस्थित हुआ। जबकि बृजेश और माधुरी, रागिनी और शिवम तथा सुनीता और रामदुलारे के मामले में कोई पक्षकार उपस्थित नहीं हुआ। इसके चलते बैठक की अगली तिथि पांच मई नियत की गई।
इस दौरान ब्यूरो केंद्र के सदस्यगण इब्राहिम सेवक, सर्वेश दूबे, विनोद कुमार सिंह, अर्चना उपाध्याय, डा.एमए खान, मौलवी अरशद, इशरावती यादव ने अपना योगदान दिया। बैठक में काफी संख्या में पक्षकार और उनके परिजन उपस्थित रहे।