मेरठ। घोसीपुर कमेले में सच क्या है, यह शायद किसी को पता नहीं है। कमेले के ठेकेदार हाजी याकूब कुरैशी अब इसमें कटान शुरू करने को अपना हक बता रहे हंै। लेकिन नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों की ओर से कोई साफ रुख न होने से पूरा मामला उलझ रहा है। वैसे भी पशु कटान का यह धंधा कुल मिलाकर रहस्यों में ही घिरा रहता है और कौन सच बोल रहा है, यह पता ही नहीं चलता है। इस धंधे की फितरत ही शायद यही है कि यह झूठ पर टिका हुआ है। यहां कुछ भी सही दावे के साथ नहीं कहा जा सकता है। कितने पशु काटने का लाइसेंस मिला है और कितने काटे जा रहे है, यह सिर्फ ठेकेदार को पता रहता है, नियम बनाने वालों को नहीं। खैर यह तो धंधा ही ऐसा है। लेकिन इस पर निगरानी करने वाले तमाम विभागों केनुमाइंदों की फितरत तो ऐसी नहीं होनी चाहिये। उन्हें तो नियमों केमुताबिक ही चलना चाहिये। और नियम अगर टूट रहे है तो उसे टूटने से रोकने में क्यों ढिलाई हो जाती है।