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मेरठ में बन रहे फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट

Meerut Updated Thu, 06 Mar 2014 05:31 AM IST
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मेरठ। पं. प्यारे लाल जिला अस्पताल में फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट बनाने वाला गिरोह सक्रिय है। यह सेना या अन्य विभागों में नौकरी पर जाने वाले युवकों से 10 से 20 हजार रुपये लेकर उन्हें मनचाहा सर्टिफिकेट देता है। बड़ी बात तो यह है कि जिस डॉक्टर के नाम और हस्ताक्षर से मेडिकल सर्टिफिकेट जारी हो रहे हैं, वह जिला अस्पताल में हैं ही नहीं। इन पर सीएमओ के हस्ताक्षर भी फर्जी हैं। गैंग उसी प्रारूप पर सर्टिफिकेट बना रहा है, जो सरकारी व्यवस्था में इस्तेमाल होते हैं।
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यह खुलासा तब हुआ, जब एक युवक ने डॉक्टर से मेडिकल सर्टिफिकेट के लिए संपर्क किया। उसने अपने साथी का सर्टिफिकेट दिखाते हुए कहा- साहब! मुझे ऐसा ही चाहिए। डॉक्टर ने सर्टिफिकेट देखा तो उस पर सभी हस्ताक्षर फर्जी मिले। 18 नवंबर-2013 को जारी इस सर्टिफिकेट पर डॉ. मनोज के हस्ताक्षर हैं, जिन्हें नेत्र रोग विशेषज्ञ दिखाया गया है। इसी तरह डॉ. राजपाल सिंह को न्यूरो सर्जन, डॉ. संजय कुमार को सर्जन दिखाकर हस्ताक्षर किए गए हैं। हकीकत यह है कि ये डॉक्टर जिला अस्पताल में हैं ही नहीं। इसमें सीएमओ मेरठ की मुहर भी नकली है।
ऐसा हुआ खुलासा:
मुजफ्फरनगर के एक युवक ने अपने साथी का सर्टिफिकेट दिखाते हुए डॉक्टर से अपने लिए मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट मांगा था। वह सर्टिफिकेट आईटीबीपी में नौकरी के लिए बनवाया गया था।
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कीमत 20 हजार!:
बताया जा रहा है कि जिला अस्पताल में फर्जी सर्टिफिकेट बनाने वाला गैंग 10 से 20 हजार रुपये लेकर सेना और अन्य विभागों में नौकरी पर जाने वाले युवकों को मनचाहा सर्टिफिकेट बनाकर देता है।
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वर्जन
हमारे यहां इस नाम का कोई सर्जन या डॉक्टर ही नहीं है। जरूर यह किसी गैंग की साजिश है, जो फर्जी तरीके से सर्टिफिकेट बना रहा है। इसके खिलाफ पुलिस और स्वास्थ्य अधिकारियों को लिखा जाएगा, ताकि कार्रवाई हो सके। -डॉ. रामेंद्र सिंह, सीएमएस, पं. प्यारे लाल जिला अस्पताल
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