मेरठ। हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकार का शुगर इंडस्ट्री को दिया गया अल्टीमेटम सोमवार को खत्म हो गया, लेकिन मिलों ने संपूर्ण गन्ना मूल्य बकाया भुगतान नहीं किया। आज सरकार को कोर्ट में भुगतान संबंधी हलफनामा दायर करना है।
राष्ट्रीय किसान मजूदर संगठन की याचिका पर हाईकोर्ट ने 28 मई को 30 जून तक किसानों के गन्ना बकाया मूल्य का संपूर्ण भुगतान करने का अादेश दिया था। इस पर सरकार ने सभी मिलो को निर्धारित समय के अंदर भुगतान करने को कहा था। भुगतान में लापरवाही करने वाली 27 शुगर मिलों की सरकार ने आरसी भी काट दी थी। साथ ही रिपोर्ट के बाद फरार चल रहे मिल मालिकों और उनके प्रबंधकों को पकड़ने के लिए पुलिस ने ताबड़तोड़ दबिश दी, लेकिन कोई हाथ नहीं आया। गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट गए आरोपियों काे कोर्ट ने राहत देने से इनकार कर दिया था। इतना दबाव होने के बाद भी शुगर इंडस्ट्री ने निर्धारित समय के अंदर किसानों का भुगतान नहीं किया। सोमवार को सरकार का दिया अल्टीमेटम भी खत्म हो गया। मंगलवार को इस बारे में गन्ना आयुक्त सुभाष चंद शर्मा को कोर्ट में पेश होकर बकाया भुगतान की रिपोर्ट हलफनामे के साथ पेश करनी है। संपूर्ण भुगतान कराने में नाकाम रहे अधिकारियों को कोर्ट का सामना करने में पसीने छूट रहे हैं। प्रदेश की शुगर मिलों ने एक माह में 2200 करोड़ रुपये का भुगतान किया। आखिरी दिन ज्यादा से ज्यादा भुगतान के लिए मारामारी मची रही।
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n220 करोड़ रुपये का हुआ भुगतान ः घाटे के नाम पर किसानों का भुगतान नहीं करने वाली मेरठ मंडल की शुगर मिलों ने हाईकोर्ट के आदेश के बाद करीब 220 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। क्षेत्र के उप गन्ना आयुक्त डॉ. वीबी सिंह ने बताया कि 30 मई से 30 जून तक मंडल की मिलों ने 219 करोड़ 75 लाख रुपये का भुगतान किया है। आखिरी दिन किनौनी शुगर मिल ने 11.72 करोड़, मवाना ने 4.55 करोड़, मलकपुर ने 0.25 करोड़, साबितगढ़ ने 1.10 करोड़ और बुलंदशहर ने 1.02 करोड़ रुपये के साथ 18.64 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। अब भी 1574 करोड़ रुपये शुगर मिलों पर अवशेष रह गए हैं।