मेरठ। सुरेंद्र कोली जीवन के अंतिम क्षण मजे में काट रहा है। उसके चेहरे में जरा भी दहशत नजर नहीं आती। जेल में भी वे सभी सुविधाएं भोग रहा है, जो किसी सामान्य बंदी से थोड़ा अलग मिलती हैं। भरपूर खाना खा रहा है। कोई टेंशन भी नहीं है। आठ साल से उसका वजन भी नहीं गिरा है।
जेल प्रशासन के सूत्रों का कहना है कि फांसी पर चढ़ने जा रहा सुरेंद्र कोली बिल्कुल नार्मल है। उससे कोई काम भी नहीं कराया जा सकता। हाई सिक्योरिटी बैरक की सिंगल सेल (तन्हाई कोठरी) में उसे कड़ी सुरक्षा मिली हुई है। कहने को कोठरी, लेकिन इसमें सभी सुविधाएं हैं। यहां तक कि ऑल आउट भी लगी है। उसकी डाइट भी अच्छी बताई जाती है। एक बार में 5-6 रोटी खा रहा है।
खुद को बताता है निर्दोष
सुरेंद्र कोली खुद को निर्दोष बताता है। आरोप लगाता है कि पंधेर भी तो अपराधी है, उसे भी फांसी पर चढ़ाना चाहिए। यही बात उसने डासना जेल में भी उस समय कही थी जब उसे मेरठ जेल शिफ्ट किया जा रहा था।
मां और बच्चों से मिलने की इच्छा
आठ साल से जेल में बंद चले आ रहे सुरेंद्र कोली को मलाल भी है। वह कहता है कि इस अंतराल में उसका कोई परिजन उससे मिलने नहीं आया। दो बच्चे हैं। एक तो उसके जेल में रहते हुए ही पैदा हुआ था। वह उसका चेहरा तक नहीं देख पाया। जीवन के अंतिम क्षणों में भी उसकी इच्छा है कि वह अपनी मां और बच्चों से मिल ले।
नहीं जानता किस जेल में है
पढ़ने या सुनने में भले ही यह अजीब लगे। लेकिन सही है कि कोली नहीं जानता कि वह किस जेल में है। वह डासना जेल के बारे में तो जानता था। लेकिन जब उसे वहां से फांसी के लिए शिफ्ट किया गया, तो नहीं बताया गया कि उसे किस जेल में ले जाया जा रहा है। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो वह नहीं जानता कि उसे मेरठ की जेल में फांसी दी जाएगी।