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डेंगू के डंक पर यशोवर्द्धन का हमला

अमर उजाला ब्यूरों Updated Wed, 03 Aug 2016 02:05 AM IST
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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डेंगू का नाम सामने आते ही एक भयावह बीमारी जेहन में उभरकर आती है। इस बीमारी को जड़ से मिटाने के लिए शहर के ही बुजुर्ग ने बीड़ा उठाया है। चार साल के अथक परिश्रम से प्रीत विहार निवासी यशोवर्द्धन योगी वर्ष 2010 में आयुर्वेद में लिखी तमाम विधियों का सहारा लेकर डेंगू की प्री-डोज तैयार करने में सफल रहे। अगले चार साल उन्होंने लगभग छह हजार लोगों पर इस दवाई का परीक्षण किया। सार्थक परिणाम सामने आए तो अकेले ही गलियों, मोहल्लों और शिक्षण संस्थानों में जाकर नि:शुल्क प्री-डोज पिलानी शुरू कर दी। आज उनके अभियान से 250 से अधिक लोग जुड़ चुके हैं। यशोवर्द्धन का दावा है कि प्री-डोज लेने पर डेंगू का वायरस शरीर में नहीं पनप पाता है। इससे शरीर की इम्यूनिटी बढ़ने के कारण कई अन्य प्रकार के बुखार होने का खतरा भी टल जाता है। 2015 में दो लाख लोगों को दवाई पिलाने वाले यशोवर्द्धन ने इस वर्ष देश के 15 लाख लोगों को लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा है।
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चौथी पीढ़ी के हैं यशोवर्द्धन  
जीवन के 60 बसंत देख चुके यशोवर्द्धन योगी का कहना है कि आयुर्वेद से संबंधित किताबों और तमाम जड़ी-बूटियों की परख के बीच वह उनका जीवन बीता हैं। परिवार की चार पीढ़ियों का आयुर्वेद से संबंध हैं। उनके परिवार को लोग वैध जी के परिवार के नाम से जानते हैं। व्यवसाय को जीवंत रखने के लिए वह अपने इकलौते पुत्र को भी इस विद्या में पारंगत कर रहे हैं।

2014 से शुरू हुआ अभियान
यशोवर्द्धन योगी ने बताया कि एशिया मेें 2006 में पहली बार डेंगू केे भयावह परिणाम सामने आए थे। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा। इस पर उन्होंने इस बीमारी का उपचार खोजने का प्रयास किया। आयुर्वेद से संबंधित तमाम किताबों के पन्ने पलटे। आयुर्वेद की जानकारी रखने वाले कई बुजुर्गों से जानकारियों जुटाई। चार साल तक शोध करने के बाद 2010 में सफलता मिली। 2014 तक करीब छह हजार लोगों पर परीक्षण किया। सार्थक परिणाम मिलने पर उन्होंने लोगों को प्री डोज नि:शुल्क पिलाने के लिए अभियान शुरू कर दिया। 2014 में बीस हजार लोगों को नि:शुल्क दवा पिलाई गई। 2015 में यह आंकड़ा 2.50 लाख पहुंचा। इस बार लक्ष्य 15 लाख का है।
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स्कूल और मोहल्लों में लगाते हैं कैंप
यशोवर्द्धन योगी ने बताया कि बरसात का मौसम शुरू होने से पहले ही वह इस अभियान में जुट जाते हैं। पिछले वर्ष मेरठ, मोदीनगर, गाजियाबाद, नोएडा और दिल्ली में वह स्कूलों, मोहल्लों, कॉलोनियाें, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर शिविर लगा चुके हैं। मेरठ स्थित केंद्रीय विद्यालय के छात्र-छात्राओं को भी इसका लाभ दे चुके हैं।

इस बार हरियाणा और दिल्ली का रूख
इस बार 15 लाख लोगों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से यशोवर्द्धन ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली, हापुड़, बागपत, गाजियाबाद, नोएडा, बिजनौर के साथ ही हरियाणा के फरीदाबाद, गुडगांव, रोहतक, सोनीपत, कैथल, जींद और दिल्ली में कैंप लगाने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए वहां की स्वयंसेवी संस्थाआें और समाजसेवियों के साथ ही स्कूल और कॉलेजों से संपर्क किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्री डोज का सेवन नवजात शिशु से लेकर 100 वर्ष के वृद्ध तक कर सकते हैं। लेकिन दवा देते हुए मनुष्य की उम्र और और सेहत का ध्यान रखा जाता है।

तमाम जड़ी बूटियों का है मिश्रण  
यशोवर्द्धन ने बताया कि गिलोय, आंवला, कालमेध, कुटकी, कुरंज, कुट्ज, पपीता रस, कपूर, सत अजवाइन, पीपरमेंट, लौंग, काली मिर्च, तुलसी पंचाग रस, मविस्ट, खदीरा, गडूची, सौंठ, दालचीनी और महासुदर्शन समेत 16 दुर्लभ जड़ी बूटियों के मिश्रण को मिलाकर यह दवाई तैयार की गई हैं। दुर्लभ जड़ी-बूटियों का नाम बताने से उन्होंने इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि यह रहस्य वह अपने और अपने परिवार में ही रखना चाहते हैं। इन जड़ी-बूटियों को वह पर्वतीय क्षेत्रों से स्वयं तलाशकर लाते हैं।
 
प्रति व्यक्ति करीब चार रुपये खर्च
यशोवर्द्धन ने बताया कि दवा तैयार करने से लेकर शिविर लगाने तक में प्रति व्यक्ति करीब चार रुपये खर्च आता है। इसमें तीन रुपये दवा तैयार करने और एक रुपया शिविर संयोजन का खर्च शामिल है। उन्होेंने बताया कि एक डोज का असर एक वर्ष तक रहता है। डोज लेने के बाद व्यक्ति पर डेंगू का वायरस असर नहीं कर पाता है, क्योंकि डोज के कारण व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है।


डेंगू के मरीज को नहीं दी जाती डोज
यशोवर्द्धन के अनुसार जो मरीज डेंगू से पीड़ित हो जाता है, उसे यह डोज नहीं दी जाती है। उसका उपचार फिर अलग औषधियों से होता है। यह प्री डोज सिर्फ बचाव के लिए है। मरीज को पूर्ण रूप से सही होने के बाद ही इस दवाई का सेवन कराया जाता है।

स्वयं सेवक कर रहे तैयार
इस बार 15 लाख लोगों को लाभान्वित करने के उद्देश्य से यशोवर्द्धन स्वयं सेवक भी तैयार कर रहे हैं। स्वयं सेवकों को दवा पिलाने के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों और लोगों की उम्र के साथ ही उनकी शारीरिक क्षमता का आंकलन करने का प्रशिक्षण सिखाया जा रहा है। यशोवर्द्धन ने बताया कि वह अब तक विभिन्न जनपदों में 250 से ज्यादा स्वयं सेवक तैयार कर चुके हैं।
 

योग और बालिका शिक्षा पर भी जोर
यशोवर्द्धन योग क्रियाएं भी कराते हैं। इसके लिए वह विभिन्न संस्थानों और स्कूल कॉलेजों में भी नि:शुल्क योग शिविर का आयोजन करते हैं। युवाओं में चरित्र निर्माण और बालिका शिक्षा के लिए भी वह जागरूकता शिविर चला रहे हैं। 2001 गुजरात के भुज में आये भूकंप के दौरान भी वह पीड़ितों की सेवा के लिए नि:शुल्क कैंप लगा चुके हैं।
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