केंद्रीय जल संसाधन एवं नदी विकास राज्यमंत्री डॉ संजीव बालियान का इस्तीफा कई सवाल खड़े कर गया है। वर्ष 2019 में लोकसभा चुनाव को देखते हुए कुछ नए चेहरों को सामने लाने की कवायद चल रही है। हालांकि बालियान की मंत्रिमंडल से विदाई के पीछे की कुछ और वजह भी टटोली जा रही हैं। भाजपा में एकाएक चमके संजीव बालियान पुराने धुरंधरों की आंख में शुरू से ही खटकते रहे।
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में सांसद डॉ संजीव बालियान की ताजपोशी जितनी चौंकाने वाली थी, विदाई भी कुछ इसी अंदाज में हुई। सोशल मीडिया पर पिछले एक हफ्ते से उनके मंत्रिमंडल से हटाकर संगठन में लाए जाने को लेकर चर्चाएं छिड़ी थीं। पीएम नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की मीटिंग के बाद यह तय हो गया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल को लेकर कुछ मंत्रियों की विदाई हो सकती है।
बृहस्पतिवार की शाम अचानक अमित शाह का बुलावा आया और बालियान से इस्तीफा लिया गया। वेस्ट यूपी में वह अकेले केंद्रीय राज्यमंत्री थे। वर्ष 2013 में मुजफ्फरनगर दंगे के बाद ही बालियान का एकाएक पार्टी में कद बढ़ता गया। कुटबा में राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी की किसान रैली से उन्होंने टिकट मांगने की राह पकड़ी। हालांकि प्रत्याशी बनने की जंग में कई अड़चनें आईं, मगर किस्मत ने बालियान का साथ दिया।
उन्हें टिकट दिए जाने से जिले के पुराने कद्दावर नेता खफा हो गए, क्योंकि भाजपा में बालियान का लंबा अनुभव नहीं था। मोदी लहर में लोकसभा चुनाव लड़े संजीव बालियान ने बसपा प्रत्याशी कादिर राना को हराकर बड़े अंतर से जीत दर्ज की। हैरत की बात यह थी कि बालियान का राजनीति में यह पहला कदम था। जीत भी मिली और केंद्रीय मंत्री पद से भी नवाजे गए। यह तब हुआ, जब कद्दावर नेता एवं कैराना सांसद हुकुम सिंह, मेरठ सांसद राजेंद्र अग्रवाल, बिजनौर सांसद भारतेंद्र सिंह, मुंबई के पूर्व कमिश्नर और बागपत सांसद सतपाल सिंह मंत्री पद की दौड़ में थे।
कहा गया कि केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री बनाए गए बालियान को युवा होने का लाभ मिला है। वैसे उनको मंत्री बनाए जाने को लेकर भी सवाल खड़े हुए, क्योंकि जिले की फिजां बिगड़ने की आशंका में बालियान को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। जिस समय हिंसा हुई थी, बालियान जेल में थे। उनके गांव कुटबी में भी दंगे में आठ लोगों की जान गई थीं। भाजपा हाईकमान ने हर आरोप को दरकिनार कर बालियान पर भरोसा जताए रखा। जाट बेल्ट में उन्हें कृषि मंत्रालय में राज्यमंत्री का दायित्व मिला, जिसे उन्होंने बखूबी निभाया। मोदी मंत्रिमंडल के फेरबदल में भी उन्हें मंत्री बरकरार रखा गया। सरकार की नमामि गंगे की महत्वपूर्ण योजना में बालियान को जल संसाधन एवं नदी विकास राज्यमंत्री बनाया गया।
कई नाकामियां तो कई उपलब्धि भी
मुजफ्फरनगर। भाजपा में बालियान के वजूद को लेकर कभी संगठन में एकरूपता नजर नहीं आई। कुछ वरिष्ठ भाजपाई उनके मंचों पर कभी दिखाई नहीं दिए, जिनमें पूर्व सांसद और पूर्व मंत्री भी शामिल हैं। तीन साल के कार्यकाल में बालियान ने उन्हें मनाने की कोशिश भी नहीं की। खासकर जाट बिरादरी से घिरे रहने की वजह से पिछड़े तबके के लोग उपेक्षित महसूस करने लगे। सांसद के चुने गए दो आदर्श गांव रसूलपुर जाटान और पीपलशाह भी विकास की राह नहीं पकड़ पाए।
जहां तक उपलब्धियों का ताल्लुक है, उसमें भाजपा की चुनाव में जीत को बनाए रखना अहम है। सदर सीट पर उपचुनाव में भाजपा के कपिलदेव अग्रवाल की जीत और जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर आंचल तोमर की ताजपोशी का श्रेय बालियान के हिस्से आया। तितावी चीनी मिल के बकाया भुगतान की विकट समस्या से भी छुटकारा दिलाया। शहर में उनके प्रयासों से दो बार सेना भर्ती रैली हुई, जिसमें पश्चिम यूपी के हजारों नौजवानों को सेना में भर्ती का मौका मिला। वर्षों से लंबित पड़ी रेल दोहरीकरण की योजना को बजट दिलाने में भी बालियान का अहम रोल रहा।
हाईकमान का फैसला सिर माथे: बालियान
मुजफ्फरनगर। केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफे पर डॉ संजीव बालियान का कहना है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के कहने पर उन्होंने इस्तीफा सौंप दिया है। पार्टी जो भी जिम्मेदारी देगी, उसे समर्पित भाव से पूरा किया जाएगा। वेस्ट यूपी में पार्टी को मजबूत करना उनका लक्ष्य है। 2019 में लोकसभा चुनाव सामने हैं, सरकार और पार्टी संगठन में हर किसी को अपनी क्षमता के आधार पर काम करना है। पार्टी का निर्देश सर्वोपरि है।