नोएडा। शुक्रवार को सेक्टर-26 में रेलवे के रिटायर्ड चीफ मेडिकल डायेरक्टर डॉ. बीपी श्रीवास्तव (76 वर्ष) को गोली नशे के इंजेक्शन का प्रेसक्रिप्शन न लिखने और लूटपाट का विरोध करने पर मारी गई थी।
एसएसपी प्रवीण कुमार ने पत्रकारों से वार्ता में बताया कि मूल रूप से जिला बुलंदशहर के स्याना निवासी हमलावर अमित नशे का आदी है। वह एक साथी हितेष के साथ डॉ. श्रीवास्तव के पास नशे के इंजेक्शन का पर्चा लिखवाने के लिए बाइक से सेक्टर-26, ए-104 स्थित उनके घर में स्थित क्लीनिक पहुंचा था। हितेष भी मूल रूप से बुलंदशहर निवासी है और डॉक्टर को पहले से जानता था। वह नोएडा में सेक्टर-20 स्थित हाइडिल कॉलोनी में रहता है। हितेष क्लीनिक के बाहर रुक गया, जबकि अमित अंदर चला गया।
अमित बीमार होने की बात कहते हुए डॉक्टर के पास पहुंचा। जांच में उसे बुखार और ब्लड प्रेशर बढ़ने की पुष्टि हुई। उसने डॉक्टर से नशे के इंजेक्शन का पर्चा लिखने के लिए कहा। मेडिकल स्टोर से उसे बिना डॉक्टर के पर्चे के इंजेक्शन देने से मना कर दिया गया था। डॉक्टर ने पर्चा लिखने से इनकार किया तो उसने पिस्तौल निकाल ली और जेब में रखे रुपये व मोबाइल देने को कहा। विरोध करने पर उसने डॉक्टर को गोली मार दी और बाहर खड़े हितेष के साथ बाइक पर बैठ फरार हो गया। एसएसपी ने बताया कि दोनों आरोपियों को मंगलवार दोपहर वसुंधरा एन्क्लेव बॉर्डर के समीप चेकिंग के दौरान पकड़ा गया है। इनके पास से वारदात में इस्तेमाल तमंचा, तीन कारतूस और बाइक बरामद हुई है। इन्हें पकड़ने वाली टीम को पांच हजार रुपये प्रोत्साहन राशि दी गई है।
अफीम जैसा होता है नशा
कैलाश अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. जीआर गोलेच्छा बताते हैं कि आमतौर पर नशे के इंजेक्शन दर्द निवारक के तौर पर दिए जाते हैं। लगातार इस्तेमाल से व्यक्ति इनका आदी हो जाता है। नशे के इंजेक्शन नॉरकोटिक एक्ट के तहत प्रतिबंधित हैं। इनके इस्तेमाल के लिए डॉक्टर का पर्चा लेना जरूरी है। बिना लाइसेंस के कोई भी अस्पताल या दवा विक्रेता इन इंजेक्शन को नहीं रख सकता। दवा विक्रेता को ड्रग कंट्रोलर को एक-एक इंजेक्शन का हिसाब देना पड़ता है।