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मरीजों के बोझ तले दबा ईएसआई मॉडल अस्पताल

Noida Updated Tue, 16 Oct 2012 12:00 PM IST
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नोएडा। एक अस्पताल और चार डिस्पेंसरियों के बूते करीब पांच लाख रजिस्टर्ड परिवारों को संभाल पाना नोएडा ईएसआई के लिए मुश्किल हो रहा है। लिहाजा नोएडा ईएसआई प्रशासन ने उच्चाधिकारियों से अतिरिक्त स्टाफ की मांग की है। इस बाबत नोएडा ईएसआई प्रशासन ने दिल्ली-नोएडा के मौजूदा ढांचे की एक तुलनात्मक स्टडी का हवाला भी दिया है।
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नोएडा ईएसआई के अधीन आने वाले अस्पताल हो या डिस्पेंसरियां सभी मरीजों के दबाव को झेल पाने में नाकाम साबित हो रही हैं। लिहाजा नोएडा ईएसआई में रजिस्टर्ड परिवारों को इलाज के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है, वहीं मौजूदा स्टाफ भी परेशान है। मौजूदा ढांचे के मुताबिक अस्पताल के पास ठीक-ठाक स्टाफ है, लेकिन मरीजों की संख्या के आगे यह संख्या बेहद कम है। लिहाजा नोएडा ईएसआई निदेशक ने अपने उच्चाधिकारियों को दिल्ली-नोएडा की एक स्टडी का हवाला देकर अतिरिक्त स्टाफ की मांग की है। निदेशक डॉ. राकेश गर्ग का कहना है कि नोएडा में महज एक अस्पताल व चार डिस्पेंसरियां हैं, जबकि दिल्ली में चार बड़े अस्पताल और करीब 30 डिस्पेंसरियों का लंबा चौड़ा नेटवर्क है। इस अनुपात में नोएडा ईएसआई के पास कई गुना अधिक परिवार रजिस्टर्ड हैं। वहीं, दिल्ली में राज्य सरकार के अधीन आने वाले अस्पतालों व डिस्पेंसरियों की स्थिति भी काफी बेहतर है।
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