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व्रत से दूर रहें मधुमेह रोगी

Noida Updated Fri, 12 Apr 2013 05:30 AM IST
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नोएडा। मधुमेह के रोगियों के लिए व्रत का खाना नुकसानदेह साबित हो सकता है। साथ ही लंबे समय तक भूखे पेट रहना भी ऐसे रोगियों के लिए घातक है। इसलिए डॉक्टरों की सलाह है कि मधुमेह के रोगी व्रत न रखें तो बेहतर है। यही नहीं, दिल और ब्लड प्रेशर समेत सामान्य लोग भी खानपान का खास ध्यान रखें।
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फोर्टिस अस्पताल की वरिष्ठ डायटीशियन डॉ. नमिता नादर बताती हैं कि व्रत में काफी संख्या में लोग घी में तले खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं, जो सेहत के लिए नुकसानदेह है। कुट्टू का आटा, साबूदाना, आलू आदि में कार्बोहाइड्रेड होता है, जिसके ज्यादा सेवन से वजन बढ़ता है। उनका कहना है कि व्रत में संतुलित मात्रा में आहार का सेवन जरूरी है। ज्यादा भूख लगे तो कुट्टू के आटे का पराठा या रोटी खा सकते हैं, लेकिन सीमित मात्रा में। पराठे में घी का इस्तेमाल नाममात्र का करें। इसे नॉनस्टिक में बनाएं। इसके अलावा सब्जियों और फलों का ज्यादा सेवन करें। फलों में पपीता. तरबूज, मौसमी और खरबूजा खाएं। केले में काफी मात्रा में कार्बोहाइड्रेड होता है, ऐसे में इसका कम सेवन करें। हल्की भूख के समय ड्राई फ्रूट खाएं, जिसमें बादाम और अखरोट फायदेमंद है। इंडोगल्फ अस्पताल के मधुमेह रोग विशेषज्ञ डॉ. जीसी वैष्णव कहते हैं कि मधुमेह के रोगी व्रत न रखे, क्योंकि खाने की ज्यादातर चीजों में कार्बोहाइड्रेड मौजूद होता है, जिससे शुगर बढ़ेगा और नहीं खाने पर शुगर का स्तर बहुत कम हो जाएगा। ऐसे में हाइपोग्लासीमिया नामक बीमारी हो जाती है, जिससे कमजोरी, चक्कर आना, आंखों के आगे अंधेरा छाना और बेहोशी तक आ सकती है। मेट्रो अस्पताल की डायटीशियन डॉ सुगंध माथुर बताती हैं कि नमक का कम सेवन करें। दिल और ब्लड प्रेशर के रोगी तले हुए खाद्य पदार्थों को न खाएं। उबली सब्जियों में काली मिर्च का पाउडर मिलाकर खाएं। हर दो या तीन घंटे पर तरल पदार्थ पिएं जिसमें नमकीन लस्सी, नारियल पानी, शिकंजी और मट्ठा ले सकते हैं। जूस से बेहतर है, फल खाएं, जिससे फाइबर भी मिलेगा।

खाने का समय
सुबह छह से सात बजे के बीच में चाय
आठ से नौ बजे तक नाश्ता
11 बजे के आसपास 300 ग्राम तक फल।
दोपहर एक से डेढ़ बजे के बीच में लंच।
तीन बजे से 3.30 बजे के बीच में चाय या जूस ले सकते हैं।
शाम 6.30 से 7.30 के बीच में डिनर।
सोते समय एक ग्लास दूध।
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