नोएडा। बिजली खपत और संकट पैदा करने में ग्रामीणों ने सेक्टर वालों को पछाड़ना शुरू कर दिया है। सेक्टरों में निर्धारित मांग के अनुसार खपत हो रही है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में दिन पर दिन बढ़ते निर्माण की वजह से डिमांड और सप्लाई में अंतर आ रहा है। प्राधिकरण के पास ग्रामीण क्षेत्र की भवन नियमावली नहीं होने से बेरोकटोक निर्माण हो रहे हैं। इसमें किरायेदारी उद्योग भी बिजली संकट पैदा करने में सहयोग कर रहा है।
नोएडा के पास 900 मेगावाट बिजली है, जो मांग के अनुरूप है। विद्युत निगम ने मास्टर प्लान 2031 तक सेक्टर और गांव का सर्वे करके एक रिपोर्ट तैयार की। इसमें कहां-कहां कितनी बिजली की आवश्यकता है और भविष्य में किन सेक्टरों में मांग बढ़ेगी, इसका आंकड़ा तैयार किया गया। रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट गोपनीय होने के कारण आंकड़ों का खुलासा नहीं किया गया, लेकिन यह जानकारी दी गई है कि नोएडा के आवासीय सेक्टरों में जितनी बिजली की आवश्यकता है, उससे करीब 26 प्रतिशत ज्यादा बिजली ग्रामीण क्षेत्रों में इस्तेमाल की जा रही है। गांव में भवन नियमावली नहीं होने की वजह से आवश्यकता से अधिक निर्माण हुआ है। यहां पर एक-एक घर में आठ से दस कूलर और चार से पांच एसी लगे हुए हैं। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यकता के अनुसार लोड लिया गया है, लेकिन तय सीमा से ज्यादा बिजली की खपत की जा रही है। इस संबंध में अधीक्षण अभियंता सीएल गुप्ता ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में दिन पर दिन मांग बढ़ती जा रही है। यही कारण है कि कई बार ट्रांसफार्मर भी फुंक जाते हैं। प्राधिकरण जब तक आवासीय सेक्टरों की तर्ज पर ग्रामीण क्षेत्र में भवन नियमावली का निर्धारण नहीं करेगा, ऐसी समस्याएं बनी रहेंगी।