पीलीभीत। बिलसंडा थाने के मालखाने से अलग-अलग बोर के 605 कारतूस गायब हैं। आईजी के निर्देश पर मालखाने की जांच में इसका खुलासा होने से पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। एसपी ने कारतूस गायब होने के मामले की जांच सीओ जहॉनाबाद को सौंपी है। इस मामले में कई पुलिसकर्मियों और अफसरों की गर्दन फंस सकती है।
दो दशक पहले तक लखीमपुर खीरी और पीलीभीत जिला उग्रवाद प्रभावित रहा था। इस कारणजिले के थानों में अत्याधुनिक असलहे उपलब्ध कराए गए थे। इनमें 303 बोर की रायफल, 303 बोर की सीटीएन, 38 बोर रिवाल्वर के अलावा इंसास, एके 47, नाइन एमएम पिस्टल, बुलेट प्रूफ जॉकेट आदि शामिल थे। बिलसंडा एसओ केपी सिंह यादव ने बताया कि तीन साल पहले यहां तैनात रहे हेड मोहर्रिर सियाराम राठौर का हरदोई जिले में तबादला हो गया था। वह बिना चार्ज दिए ही यहां से चले गए थे। डेढ़ महीने पहले तत्कालीन आईजी मुकुल गोयल को वार्षिक निरीक्षण के दौरान मालखाने का चार्ज न देने की जानकारी हुई थी। उनके आदेश पर एसपी ने एसओ बिलसंडा की अध्यक्षता में एक टीम बनाई गई। टीम में कसबा इंचार्ज चंद्रपाल सिंह और दो हेडकांस्टेबल शामिल किए गए।
टीम ने ताला तोड़कर जब मालखाने की जांच की तो 605 कारतूसों समेत कई सामान गायब होने की जानकारी हुई। उन्होंने बताया कि उग्रवाद के दौरान इस्तेमाल हुए कारतूसों का लेखाजोखा मौजूद नहीं है। पत्रावलियों के मिलने के बाद ही सही स्थिति पता चल सकेगी। उन्होंने बताया कि हेड मोहर्रिर को रिकार्ड उपलब्ध कराने के लिए लिखित रूप से सूचित किया गया है। मामले की रिपोर्ट एसपी को सौंप दी गई है।
मालखाने से गायब सामान
363 कारतूस ( 303 बोर थ्री नॉट थ्री)
17 कारतूस (303 सीटीएन )
13 कारतूस (38 बोर रिवाल्वर)
60 कारतूस (नाइन एमएम पिस्टल)
72 कारतूस (इंसास)
80 कारतूस (एके 47)
01 बुलेट प्रूफ जॉकेट
01 बुलेट प्रूफ पटका
02 हथकड़ी
मामला करीब 15 साल पुराना है, लेकिन खुलासा टीम की जांच पर हुआ है। मामले की जांच सीओ जहॉनाबाद बसंत लाल से कराई जा रही है। जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। जांच के बाद दोषियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। -अमित वर्मा, एसपी पीलीभीत।