बाघिन के हमलों से ग्रामीणों में दहशत
बाघिन के लगातार हमलों से ग्रामीणों में दहशत है। एक के बाद एक चार लोगों के मारे जाने और महिला के घायल होने से बाघिन को पकड़ने की मांग तेज हो गई है। सोमवार को घटना के विरोध में लोगों ने करनापुर में प्रदर्शन कर नारेबाजी की गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बाघिन पर जल्द अंकुश न लगा तो यह विधानसभा चुनाव में बड़ा मुद्दा बन सकता है। टाइगर रिजर्व घोषित होने से पूर्व ही जंगल से सटे क्षेत्र में वन्यजीवों से सुरक्षा की समस्या के चर्चे शुरू हो गए थे। आशंका व्यक्त की जा रही थी कि टाइगर रिजर्व बनने के बाद बाघों की संख्या बढ़ेगी जो क्षेत्रवासियों के लिए समस्या बन सकती है। लोगों की यह आशंका अब सच साबित होती प्रतीत हो रही है। नवंबर से अब तक एक ही क्षेत्र में एक ही बाघिन के हमले हो रहे हैं। इसमें चार लोगों की मौत हो चुकी है जबकि रविवार/सोमवार को करनापुर में महिला मंजीत कौर बाल बाल मच गई। घटना के विरोध में सोमवार को आसपास के लोगों ने गांव में एकत्र होकर प्रदर्शन किया।
चुनावी मुद्दा न बन जाए खूनी बाघिन
चुनाव की इस बेला में विरोधी पार्टियों को बाघिन के हमले ने बैठे बिठाए मुद्दा दे दिया है। वह इसे कैश कराने के प्रयास में हैं। जनसभाओं एवं संपर्क के दौरान इसपर चर्चा भी शुरू कर दी गई है वहीं रविवार को धनीराम की मौत और सोमवार को महिला पर हमले के बाद पार्टियों के प्रत्याशियों ने गांव पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। शायद यही वजह है कि हमले को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने के चलते ही मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक उमेश शर्मा को पीलीभीत पहुंचकर रणनीति बनानी पड़ रही है।