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मुंगेर के असलहों से हो रही आपराधिक वारदात

अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़ Updated Sun, 17 Apr 2016 11:52 PM IST
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घरवालों पर चला दी गोलियां - फोटो : demo pic
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जनपद में आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने के लिए शातिर अपराधी बिहार प्रांत के मुंगेर के असलहों का प्रयोग कर रहे हैं। पिस्टल, तमंचा के साथ छोटी बड़ी रिवाल्वर भी रुपये देने के बाद असलहों के सौदागर उपलब्ध कराते हैं। इनकी कीमत पांच हजार से लेकर 30 हजार तक पहुंच गई है। पुलिस अधिकारी भी  दावा करते हैं कि लूट, हत्या समेत अन्य घटनाओं में मुंगेर के बने असलहे ही प्रयोग किए जा रहे हैं। जनपद में आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने वाले अपराधियों की पहली पसंद बिहार प्रांत के मुंगेर के बने असलहे पसंद हैं। उनकी बनावट व अचूक निशाना ही अपराधियों के आकर्षण का केंद्र है। खास बात यह है कि भले ही मुुंगेर में असलहे बनाए जाते हैं लेकिन उन पर मेड इन इटली और मेड इन इंग्लैंड का मार्का बनाकर असलहों के सौदागर उसे विदेशी तक बना देते हैं।
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जनपद में नाइन एमएम की पिस्टल भले ही प्रतिबंधित है लेकिन अनेकों हत्या, लूट व दूसरी घटनाओं में नाइन एमएम पिस्टल को अपराधियों ने प्रयोग किया है। इतना ही नहीं असलहों के कारतूस बहुत आसानी से लोगों को उपलब्ध नहीं हो सकते लेकिन असलहों के सौदागर लोगों को बराबर असलहे व कारतूस उपलब्ध कराते हैं। पुलिस के मुताबिक जनपद में सनसनीखेज आपराधिक घटनाओं में भी अपराधियों ने नाइन एमएम पिस्टल के साथ 315 बोर के तमंचे का प्रयोग किया है। वह चाहे अधिवक्ताओं की हत्या का मामला हो या रोडवेज बस लूटकांड। मानिकपुर थाने पर हमला में भी अपराधियों ने मुंगेर के बने असलहे के प्रयोग की बात मानी थी। घटना में शामिल जो अपराधी पकड़े भी गए। उनके पास से बरामद असलहे मुंगेर के ही बने हुए थे। पूछताछ के बाद भी पुलिस के हाथ ऐसी कोई कड़ी नहीं लगी। जिससे वह हथियारों के सप्लायरों तक पहुंच सके। खास बात यह है कि छानबीन के दौरान यह बात प्रकाश में आ चुकी है कि असलहों के सौदागर जौनपुर व इलाहाबाद के रास्ते असलहा जनपद में सप्लाई करते हैं।

असलहों के मुख्य सौदागर नहीं पहुंचती पुलिस
जनपद में आए दिन अवैध असलहों के बल पर लूट, हत्या समेत अन्य जघन्य अपराध करने वाले बदमाशों को पुलिस आसानी से पकड़ लेती है। उनके पास बरामद असलहे भी मुंगेर के ही निर्मित मिलते हैं। पूछताछ के दौरान पुलिस को सिर्फ इतना ही पता लग पाता है कि आमुक व्यक्ति ने उसे असलहा उपलब्ध कराया था। उस तक पुलिस पहुंच पाती। इससे पहले ही वह घर छोड़कर फरार हो जाता है। काम के बोझ में दबे पुलिसकर्मियों को फिर ऐसे लोगों के धरपकड़ की फुर्सत नहीं मिलती। इसके चलते असलहों का मुख्य सप्लायर पुलिस के हाथ नहीं लग पाता।
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हथियार का अलग- अलग तय है रेट
मुंगेर व तराई में बनने वाले असलहों की कीमत भी तय हैं। जो असलहे मुंगेर या तराई में स्थित असलहा फैक्ट्री से लोग दो से दस हजार के बीच खरीदते हैं। वही असलहा जनपद मेें आने के बाद महंगा हो जाता है। खास बात यह है कि बारह बोर का तमंचा मुंगेर में नहीं बनता। केवल 315 बोर, पिस्टल, रिवाल्वर ही वहां उपलब्ध होती है। सूत्रों की मानें तो नाइन एमएम की पिस्टल 25 से 35 हजार रुपये, रिवाल्वर 15 से 20 हजार, 315 बोर का असलहा पांच से आठ हजार रुपये को मिलता है। जबकि रिवाल्वर जो पांच व छह राउंड के होती है। उसके दाम में भी दो से लेकर तीन हजार रुपये का अंतर रहता है। लालगंज, हथिगवां व मानिकपुर थाना क्षेत्र के तराई में निर्मित असलहों की कीमत पांच हजार से लेकर दस हजार तक बताई जाती है।

जेल से तय होता है असलहों का सौदा
जिला कारागार में निरुद्ध शातिर बंदी वहां से अपना धंधे की डील करते रहते हैं। लखनऊ एसटीएफ की टीम ने करीब दो माह इलाहाबाद में असलहा तस्करों को दबोचा था। जिसमे यह बात सामने आई थी कि जेल में निरुद्ध कुछ बंदी असलहों की सप्लाई का आर्डर दिए थे। पकड़े गए असलहा तस्कर के पास से बड़ी मात्रा में मुंगेर के निर्मित असलहे मिले थे। जिसे प्रतापगढ़ भेजने की तैयारी थी।
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