रायबरेली। गरीबों को छत मुहैया कराने की केंद्र की महत्वाकांक्षी योजना दम तोड़ गई है। जिले में 5849 आवासों के लक्ष्य के सापेक्ष विभाग ने 4618 गरीबों को ही प्रथम किस्त दिया। इसमें मात्र 787 लाभार्थियों को छत डालने के लिए दूसरी किस्त दी गई। 3831 लाभार्थियों को दूसरी किस्त की दरकार है। वित्तीय वर्ष के 11 महीने गुजर गए हैं, लेकिन अब तक मात्र 236 आवासों में ही छत पड़ पाई है। विभाग के खाते में अभी भी दो करोड़ 27 लाख रुपये डंप पडे़ हैं। वित्तीय वर्ष 2012-13 में जिले में 5849 इंदिरा आवासों के निर्माण का भौतिक लक्ष्य रखा गया। लक्ष्य के सापेक्ष डीआरडीए ने लाभार्थियों को प्रथम किस्त के रूप में धनराशि नहीं दी। 30 जून 2012 तक मात्र 4618 लाभार्थियों को ही प्रथम किस्त देकर आवास निर्माण शुरू कराने के निर्देश दिए। 30 सिंतबर 2012 तक प्रथम किस्त का उपभोग करने के बाद लाभार्थियों को दूसरी किस्त देने के आदेश शासन स्तर से दिए गए, लेकिन विभाग ने मात्र 787 लाभार्थियों को ही दूसरी किस्त मुहैया कराई। खास बात यह कि विभाग ने शासन की ओर से बार-बार डिमांड किए जाने के बाद भी दूसरी किस्त की डिमांड नहीं भेजी। लापरवाही के कारण केंद्र की ओर से समय से दूसरी किस्त नहीं मिल सकी। हालांकि विभाग के खाते में दो करोड़ 27 लाख रुपये डंप हैं। विभाग के पास दूसरी किस्त देने के लिए पर्याप्त धन भी है, लेकिन लाभार्थियों को दूसरी किस्त नहीं दी जा रही है। बताते हैं कि 31 मार्च के पहले दूसरी किस्त न दिए जाने से लाभार्थियों को योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा और आवासों में छत भी नहीं पड़ पाएगी।