रायबरेली। सूबे में सिर्फ बहराइच में ही नही खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की लापरवाही के कारण जिले में भी मिलावटी दूध का धंधा फलफूल रहा है। यहां तक कि दूध कलेक्शन सेंटरों पर तमाम अव्यवस्थाएं होने के कारण दूध प्रदूषित हो जाता है। जनवरी महीने से लेकर अब तक दूध के केवल आठ नमूने लिए गए। इसमें दो नमूनों की जांच रिपोर्ट भी आ गई है। दूध में पानी की मात्रा मिली है। इसके अलावा किसी भी प्रकार का केमिकल दूध में नहीं मिला। खास बात यह कि विभाग ने पैकेट बंद दूध का साल भर में एक भी नमूना नहीं लिया है। गोरखधंधे को रोकने के लिए कडे़ कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। यही वजह है कि दूधिए दूध में पानी मिलाकर लोगों को पिला रहे हैं।
जिले में हर रोज करीब तीन लाख लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। इसमें 60 हजार लीटर दूध दिल्ली, लखनऊ, फतेहपुर सहित अन्य जिलों को रोजाना भेजा जाता है। जिले में करीब सवा दो लाख लीटर दूध की सप्लाई की जाती है। इसमें करीब 30 हजार लीटर दूध शहर में खप जाता है। बाहर से सिर्फ अमूल का करीब पांच हजार लीटर दूध आता है। गांवों में और दूधियों में भी करीब 15 हजार लीटर दूध खप जाता है। दूधिए दूध में पानी की मिलावट खूब करते हैं। विभाग की ओर से लिए गए नमूनों में भी पानी की मात्रा ही मिली है। इसके अलावा दूध में किसी भी प्रकार का केमिकल नहीं पाया गया, लेकिन हकीकत ये है कि दूधिए पानी के साथ ही केमिकल व अन्य सामान मिलाकर दूध को दूषित कर रहे हैं। पानी मिले दूध को गाढ़ा करने के लिए उसमें पाउडर व अन्य सामग्री मिलाते हैं। झाग लाने के लिए वॉशिंग पाउडर का प्रयोग किया जाता है। अहम् बात यह है कि विभाग ने पैकेट बंद दूध का एक भी नमूना आज तक नहीं लिया है, जबकि शहर और उसके आसपास के क्षेत्र में 100 से अधिक दुकानों में यह दूध बिकता है।