रायबरेली। शादी के लिए राजी न होने पर एक युवती की हत्या करने वाले को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अभियुक्त पर 11 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। यह फैसला अपर सत्र न्यायाधीश जनार्दन सिंह ने गुरुवार को सुनाया।
अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करने वाले एडीजीसी (क्रिमिनल) गिरिजेश कुमार सिंह के अनुसार, मामले की रिपोर्ट वख्तराय का पुरवा की रामकांती ने कोतवाली सलोन में 27 सितंबर 2008 को दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, वह एमए में पढ़ने वाली अपनी बेटी हेमलता (23) के साथ छप्पर के नीचे अलग-अलग चारपाई पर सो रही थी। रात करीब 2:30 बजे मुन्नू उर्फ सुशील शर्मा निवासी नुरुद्दीनपुर अपने दो अज्ञात साथियों के साथ दीवार फांदकर घर में घुस आया। अभियुक्त के हाथ में तमंचा था। उसने बेटी को मारने के लिए तमंचा ताना। मुकदमा वादिनी ने बेटी को न मारने के लिए मिन्नत की, लेकिन उसने बेटी पर फायर कर दिया। अभियुक्त शादीशुदा व बच्चे होने के बावजूद बेटी से जबरन शादी करना चाहता था। बेटी के शादी के लिए तैयार न होने पर उसने उसे गोली मार दी। अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। कोर्ट ने दोनों पक्ष की बहस सुनने के बाद पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर अभियुक्त को हत्या के आरोप में दोषसिद्ध कर सजा सुनाई।