रामपुर। सोजख्वां ने खास अंदाज में मरसिया को सोजखानी की शक्ल में पेश किया। सोजखानी में शहीदाने कर्बला का जिक्र आया तो माहौल गमगीन हो गया। यह फन खत्म होता जा रहा है इसे जिंदा रखने के लिए रजा लाइब्रेरी ने पहल की है।
नवाबी दौर में सोजख्वानी के तमाम फनकार थे। शहीदाने कर्बला के गम में सोजख्वानी पढ़ी जाती थी। नवाबी खत्म होने के बाद सोजख्वानी का फन धीरे-धीरे खत्म होता गया। रजा लाइब्रेरी ने इस फन को जिंदा रखने की पहल की है। इसी के सिलसिले में शुक्रवार को रजा लाइब्रेरी के ख्याबाने रजा के सभागार में सोजख्वनी का प्रोग्राम मुनक्किद किया गया। आगाज कारी अनवार ने कुरान की तिलावत से किया। साथ ही आद उल्ला खां ने नात पाक का नजराना पेश किया। इसके बाद सोजख्वां सैयद साबिर रजा, सिब्ते हैदर, सैयद असद अली अलीगढ़, लियाकत हुसैन बिजनौर, जमील अहमद खां दिल्ली, जमील अहमद रामपुरी, सैयद हसन ने खास अंदाज में मरिसया को सोजख्वानी की शक्ल में पेश की। सोजख्वानी में शहीदाने का कर्बला का वाकया बयान किया गया तो माहौल गमगीन हो गया।
इससे पहले लाइब्रेरी के डायरेक्टर प्रोफेसर एसएम अजीजउद्दीन हुसैन ने सोजख्वानी पर तफ्सील से रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि यह फन खत्म होता जा रहा है। रामपुर में सोजख्वानी के तमाम फनकार थे। इसमें अरुण सक्सेना, आददुल्ला खां, तवस्सुम साबिर, मुहम्मद तारिक, डा. मेहंदी हसन, अजहर इनायती, शाहिद महमूद खां, अनोनो महमूद भी थे।