सैदनगर। भोट बक्काल में एक ही घर से दादा-दादी और पोती के जब जनाजे उठे तो हर आंख छलक उठी। परिवार ही नहीं बल्कि ग्रामीणों का रोकर बुरा हाल था। कड़ी सुरक्षा के बीच तीनों के शवों को सुुपुर्द ए खाक कर दिया गया।
भोट बक्काल केमुजफ्फर और उनकी पत्नी जेबुलनिशां व पोती सायरीन के लिए खांसी का सीरप जहर बन गया। तीनों की मौत के बाद कल से ही गांव में मातम का माहौल पसर गया था। मंगलवार की सुबह जब तीनों की लाशें गांव पहुंची तो हर तरफ चीत्कार सुनाई दे रही थी। यहां लोगों की भीड़ मुजफ्फर के घर के सामने लगी हुई थी। सुपुर्द ए खाक का समय सुबह दस बजे निर्धारित किया गया था,लेकिन ग्रामीणों के जाम लगा देने की वजह से समय को आगे बढ़ा दिया गया। दुपहर करीब ढाई बजे तीनों के जनाजे उठे तो हर तरफ चीत्कार का माहौल था। इस दौरान अजीमनगर केसाथ ही आसपास के थानों की फोर्स और पीएसी के जवान भी मौजूद रहे। कड़ी सुरक्षा के बीच दोपहर में गांव के ही कब्रिस्तान में तीनों के शवों को आसपास ही दफन कर दिया गया। इस दौरान भी लोगों के आंसू थम नहीं रहे थे। परिवार के लोगों का रोकर बुरा हाल था। गांव में कल से ही चूल्हे नहीं जल पाए।