रामपुर। जनपद में दरी कारोबार भले ही गति पकड़ रहा हो, लेकिन दरी बनाने वाले बुनकरों की हालत में कोई खास सुधार नहीं आ रहा है। अब बुनकरों के हालात सुधारने को सरकार ने 90 प्रतिशत अनुदान पर हथकरघा देने की योजना तैयार की है। हैंडलूम डिपार्टमेंट के माध्यम से बुनकरों को हथकरघे दिए जाएंगे। बुनकर सेवा केंद्र मेरठ बुनकरों को विशेष प्रशिक्षण देगा।
कपड़ों की कतरनों से बनने वाली दरी समाज के एक बड़े तबके पसंद बन गई हैं। अन्य दरियों के मुकाबले सस्ती इन दरियों को जनपद के सैफनी और स्वार-टांडा क्षेत्र में बनाने का कार्य कुटीर उद्योग का रूप अख्तियार कर चुका है। हैंडलूम डिपार्टमेंट से प्राप्त जानकारी के अनुसार सैफनी और स्वार-टांडा क्षेत्र के दर्जनों गांवों में करीब 10 हजार बुनकर कपड़ों की कतरन से दरी बनाने के काम में जुटे हैं। करीब 2000 लोग नियमित तरीके से दरी बना रहे हैं और शेष लोग वर्ष में बमुश्किल छह माह दरी बुनते हैं। इसकी एक वजह बुनकरों के पास अच्छे हथकरघे न होना और आवश्यक प्रशिक्षण की कमी है। हैंडलूम अफसरों के अनुसार केंद्र सरकार ने बुनकरों के लिए एक योजना तैयार की है। इस योजना के तहत 15000 हजार रुपये कीमत तक के आधुनिक हैंडलूम बुनकरों को 10 प्रतिशत कीमत पर उपलब्ध कराएंगे। इन हैंडलूम की कीमत का 70 प्रतिशत केंद्र सरकार और 20 प्रतिशत प्रदेश सरकार वहन करेगी। यही नहीं इन हैंडलूम पर काम करने के आधुनिक तरीकों का प्रशिक्षण भी बुनकर सेवा केंद्र मेरठ के विशेषज्ञों की ओर से दिलवाया जाएगा। इससे बुनने की कला में और निखार आएगा।