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हड़ताल के चलते थम सी गई जिंदगी

Sitapur Updated Fri, 22 Feb 2013 05:30 AM IST
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सीतापुर। केंद्र सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ विभिन्न संगठनों की हड़ताल गुरुवार को जारी रही। लगातार दो दिनी हड़ताल से लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। बैंक, बीमा कार्यालय, डाकघर के अलावा कई कारखानों में कामकाज नहीं हो सका। क्लीयरिंग हाउस बंद रहने से करोड़ों का लेन-देन नहीं हो सका। सरकारी बसें न चलने से लोगों को आवागमन में काफी परेशानी उठानी पड़ी। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद व उप्र राज्य कर्मचारी महासंघ ने भी मांगों को लेकर कार्य बहिष्कार कर विकास भवन के समक्ष धरना दिया। अनुमान है कि इस हड़ताल से जिले के चलते जिले भर में करीब 513 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित रहा।
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विभिन्न ट्रेड यूनियन व कर्मचारी संगठनों की ओर से बुलाई गई दो दिवसीय हड़ताल का गुरुवार को भी व्यापक असर दिखा। गुरुवार को भी राष्ट्रीयकृत और ग्रामीण बैंकों की शाखाओं समेत डाकघरों और बीमा कार्यालयों में कामकाज ठप रहा, जिससे आमजन को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस की ओर से बुलाई गई हड़ताल के दूसरे दिन जिले की बारह राष्ट्रीयकृत बैंकों की सभी 56 शाखाओं समेत ग्रामीण बैंक 114 शाखाओं में ताले लटकते रहे, जिससे करीब 430 करोड़ रुपये का लेनदेन बाधित हुआ। हड़ताल से बीमा क्षेत्र का करीब दो करोड़ का लेनदेन प्रभावित हुआ। क्लीयरिंग हाउस बंद होने से कारोबारियों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। गुरुवार को भी डाक विभाग के करीब 1100 कर्मी पूरी तरह हड़ताल पर रहे। जिससे प्रधान डाकघर समेत सभी चालीसों उप डाकघरों पर पूरे दिन ताले झूलते रहे, जिससे डाक का वितरण नहीं हुआ। विभाग का करीब एक करोड़ का लेनदेन बाधित हुआ।
उधर, हड़ताल में रोडवेज कर्मचारियों के शामिल होने से लोगों को काफी दिक्कतें उठानी पड़ीं। रोडवेज बसों के चक्के जाम रहे। ऐसे में लोगों को आवागमन के लिये रेलगाड़ियों व निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ा। इससे विभाग को करीब 10 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।
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रोडवेज बसों के चालक व परिचालकों के हड़ताल पर जाने से जिले से बसों का संचालन नहीं हो सका। हड़ताल के कारण रोडवेज की सभी 113 बसों का संचालन बंद रहा। इसके चलते हजारों यात्रियों को काफी परेशानी हुई। बस न चलने से छोटी लाइन रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की भीड़ जमा रही। यात्रियों की संख्या अधिक होने के कारण ट्रेनों में सफर करने में भी असुविधाओं का सामना करना पड़ा।

निराश लौटे लोग
सातवें वेतन आयोग को लागू करने, बढ़ती महंगाई को रोकने एवं 50 प्रतिशत डीए का वेतन में मर्जर समेत अन्य मांगों को लेकर कर्मचारियों की हड़ताल गुरुवार को भी जारी रही। राज्य कर्मचारी कल्याण संयुक्त परिषद ने कार्य बहिष्कार जारी रख विकास भवन के समक्ष नारेबाजी की। हड़ताल के चलते सरकारी दफ्तरों में कामकाज ठप रहा। इससे अपने काम के लिए विकास भवन आए लोगों को निराश होकर लौटना पड़ा। उधर, राज्य कर्मचारी महासंघ के कर्मचारियों ने लोक निर्माण विभाग में प्रदर्शन किया। देर शाम कर्मचारियों ने हड़ताल समाप्त कर शुक्रवार से कार्य पर लौटने की घोषणा की। कार्य बहिष्कार के चलते विकास भवन परिसर व अन्य सरकारी दफ्तरों में सन्नाटा पसरा रहा। कर्मचारियों ने विकास भवन के समक्ष एकत्रित होकर केंद्र व राज्य सरकार विरोधी नारे लगाये। संघ के जिलाध्यक्ष चंद्रभानु सक्सेना ने कहा कि सरकार कर्मचारी हित में कोई कार्य नहीं कर रही है। उप्र राज्य कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति के आह्वान पर कर्मचारियों ने लोक निर्माण विभाग परिसर में एकत्रित होकर प्रदर्शन किया। अध्यक्षता वीपी सिंह व रामकांत मिश्र ने की।

चीनी मिल में हुआ प्रदर्शन
महमूदाबाद (सीतापुर)। दि किसान सहकारी चीनी मिल के कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार कर मजदूर सभा के नेतृत्व में मिल गेट पर दूसरे दिन भी कर्मचारियों का धरना जारी रहा। इकाई अध्यक्ष गयाप्रसाद, महामंत्री शरीफ खां ने कहा कि चीनी मिल प्रशासन द्वारा श्रमिकों व कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है। धरने के दौरान मिल कर्मचारी नंद किशोर, हरीराम, यज्ञ प्रसाद, शरीफ खां, इकबाल हुसेन, सिद्धि प्रसाद, कुंज बिहारी समेत अन्य लोगों की मौजूदगी रही।


ये हैं मुख्य मांगें
महंगाई के लिये जिम्मेदार सरकारी नीतियां बदली जाए।
महंगाई का न्यूनतम भत्ता बढ़ाया जाए।
सरकारी संगठनों में अनुकंपा के आधार पर नौकरियां मिलें।
पुरानी पेंशन स्कीम लागू हो।
स्थाई कर्मचारियों की भर्तियां की जाएं।
सरकारी कंपनियों का विलय प्राइवेट कंपनियों में न हो
बैंकों के विलय की पॉलिसी लागू न की जाए।
श्रम कानूनों में श्रमिक विरोधी नीतियां न लागू हों।
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