महोली (सीतापुर)। पुरुषवादी समाज व सामंती सोच को झकझोरता ‘जमुनिया’ नारी शोषण की व्यथा कह गया। शनिवार को लालपुर चंद्रा (चड़रा) गांव के एनएमडीसी स्कूल में मंचित हुए नाटक ने नारी उत्पीड़न और शोषण के खिलाफ महिलाओं में नई ऊर्जा भरी। करीब 2.10 घंटे के इस शो में लोग खामोशी के साथ नाटक के पात्रों से खुद को जोड़ते चले गए। जुल्म व सितम के खिलाफ ‘जमुनिया’ ने सबला बनकर अपना हक और सम्मान जनक जीवन हासिल किया। दर्शक भी नाटक के इस कलाइमेक्स को देख तालियां बजाने पर मजबूर हो गए।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के गीत एवं नाटक प्रभाग द्वारा मंचित ‘जमुनिया’ का आगाज विशालकाय मंच पर बिखरी रंग-बिरंगी रोशनी के बीच हुआ। मंचन का शुभारंभ केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। मंत्रालय के ‘तस्वीर बदलते भारत की’ कार्यक्रम के तहत इस ध्वनि एवं प्रकाश की रंग मंचीय प्रस्तुति की जा रही है। मंचन के पहले चरण में घरेलू हिंसा की शिकार ‘जमुनिया’ को जब घर से निकाला गया, तो उसे गांव के दबंग सरपंच के वहां पनाह। उसे सरपंच की जुल्म-ज्यादती का शिकार होना पड़ा। इसके बाद ‘जमुनिया’ के जीवन में एक ऐसी बदलाव की बयार चली कि वह गांव की सरपंच चुनी गई। इसके बाद ‘जमुनिया’ ने गांव में विकास का ऐसा उजियारा फैलाया कि उसका हर कोई कायल हो गया। नाटक के जरिये यह भी दर्शाया गया कि भारत की महिलाएं जीवन के विभिन्न क्षेेत्रों में पूरी दुनिया में अपना परचम लहरा रहीं हैं। डेढ़ सैकड़ा कलाकारों के जीवंत अभिनय ने दर्शकों को दो घंटे तक बांधे रखा। मंचन के निर्देशक मंत्रालय के गीत एवं नाटक प्रभाग के अपर निदेशक एलआर विश्वनाथ, सहायक निर्देशक रजनेश भगत, मनोज बंसल और बलजीत सिंह हैं। ‘जमुनिया’ की भूमिका पुष्पा मंडल और मुख्य खलनायक की भूमिका सुशील कुमार ने निभाई है। इसके अलावा झूलन काका और गुरू जी का रोल क्रमश: सुधीर श्रीवास्तव और रविंद्र पांडेय निभाया। इस मौके पर मंत्रालय के भास्कर जोशी भी मौजूद रहे।