सीतापुर। अपर सत्र न्यायाधीश रविंद्र विक्रम सिंह ने सामूहिक बलात्कार के एक मामले में तीन दोषियों को दस-दस वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही तीनों पर साढ़े पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इस मामले में पांच अन्य आरोपी सबूतों के अभाव में बरी हो गए। अभियोजन पक्ष की ओर से इस मुकदमे की पैरवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता बृजेंद्र कुमार अवस्थी ने की।
हरगांव थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी एक व्यक्ति ने बताया कि वह ताजिया बनाता है। लखीमपुर के कबेलपुर थानपा निवासी रईस व कय्यूम उसके यहां ताजिया बनाना सीखने आए थे। उसके मुताबिक दो मई 2006 की रात रईस, कय्यूम अपने ही गांव के नरेश, बुलक्के तथा हरगांव थाना क्षेत्र के जलीस, समीउद्दीन, रऊफ और अमीन के साथ रात में उसके घर में घुस आए। परिवार वालों को बंधक बनाकर रात में करीब एक बजे उसकी बहन को जबरन उठा ले गए। उसने आरोपियों के खिलाफ 9 मई को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। केस दर्ज करने के बाद पुलिस ने विवेचना शुरू की। 17 मई 2006 को वादी की बहन का पता लगाने के बाद पुलिस ने उसका चिकित्सीय परीक्षण कराया। पीड़िता के एक्सरे व चिकित्सीय परीक्षण के बाद पुलिस ने रईस, जलीस, रऊफ, समीउद्दीन, अमीन, कय्यूम, नरेश व बुलक्के के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। न्यायालय ने प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर रईस, समीउद्दीन व अमीन को अपहरण व सामूहिक बलात्कार का दोषी पाया। जबकि कय्यूम, नरेश, जलीस, रउफ व बुलक्के व को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। दोषी ठहराए गए तीनों को दस वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। दोषियों पर साढ़े पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना न अदा करने पर तीनों को आठ-आठ वर्ष का सश्रम कारावास भी भुगतना होगा।
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