बीना में राष्ट्रव्यापी हड़ताल के क्रम में प्रदर्शन करते एटक के लोग।
10वें वेतन समझौता सहित 15 सूत्री मांगों को लेकर शुक्रवार को हुई इंटक, एटक, सीटू की राष्ट्रव्यापी हड़ताल एनसीएल में बेअसर रही। इस दिन एनसीएल में रोजाना की अपेक्षा लगभग आठ प्रतिशत अधिक कोयला उत्पादन और एक प्रतिशत अधिक कोयला प्रेषण हुआ। बीएमएस, एचएमएस, आरसीएमएस और सीटिया का समर्थन न मिलने से, हड़ताल कोयला खदान क्षेत्र के बाहर ही प्रभावी रही। हड़ताली कर्मियों ने बीना, ककरी, खड़िया, कृष्णशिला, दुद्धीचुआ, जयंत, अमलोरी, गोरबी, सिंगरौली मुख्यालय आदि पर धरना-प्रदर्शन कर केंद्रीय नीतियों की मुखालफत की।
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कहा कि केंद्र सरकार मजदूर विरोधी नीतियां अपनाए हुए है। ठेका एवं आउटसोर्सिंग प्रथा समाप्त करने और इसमें लगे मजदूरों को स्थायी करने, समान काम के लिए समान वेतन देने, श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी संशोधन बंद करने, मुनाफा कमाने वाले सार्वजनिक क्षेत्र का विनिवेश बंद करने आदि मांगों पर जरा भी संजीदगी नहीं दिखाई जा रही है। वहीं बीएमएस, सीटिया के लोगों का कहना था कि हड़ताल के बिंदुओं में कोल इंडिया से जुड़े मुद्दे शामिल नहीं थे, इसलिए वह लोग हड़ताल से अलग रहे। सीटिया के एनसीएल जोन सचिव बीके पटेल ने बताया कि किसी परियोजना में सौ प्रतिशत तो किसी में नब्बे से 95 प्रतिशत तकनीकी कर्मियों की उपस्थिति बनी रही।