बीघापुर (उन्नाव)। राजा राव राम बक्स सिंह के किले में खजाना दबा होने की खबर आम होने के बाद खुद को राव राम बक्स सिंह का वंशज बताने वाले तीन लोग आगे आए हैं। उनका कहना है कि वह महल से निकलने वाले सोने पर दावा नहीं कर रहे हैं लेकिन उनकी मांग है कि उन्हें भी डौड़ियाखेड़ा में बसाया जाए। उनका कहना है कि वह सभी जल्द ही डीएम से मुलाकात कर उनसे एक समिति गठित करने और उसमें डौडियाखेड़ा गांव के बुद्धजीवियों, उनको और प्रशासनिक अफसरों को शामिल करने की मांग करेंगे। वंशजों का कहना है कि मांग की जाएगी कि जो भी खजाना निकले उससे राव साहब के ध्वस्त किले का जीर्णोद्धार और गांव का विकास कराया जाए।
राव राम बक्स सिंह नि:संतान थे। वह दो भाई थे। उनके छोटे भाई देवी बक्श सिंह थे। 40 वर्ष की उम्र में अंग्रेजों ने राव राम बक्श सिंह को फांसी पर चढ़ा दिया था। उनकी विधवा पत्नियों ने देवर के लड़के उदित नारायण को गोद ले लिया था। उदित नारायण के दो पुत्र राव चंद्रशेखर बक्स सिंह और लाल महादेव बक्स सिंह हुए। विवाह के छह माह बाद ही लाल महादेव की मौत हो गई। चंद्रशेखर बक्श सिंह के पुत्र शंभूभान सिंह हुए। शंभूभान सिंह के तीन पुत्र राव चंदी वीर प्रताप सिंह, अंबी वीर प्रताप सिंह व राजेश कुमार सिंह मौजूदा समय में हैं। यह सभी पुरवा में रह रहे हैं। राव राम बक्स सिंह के डौडियाखेड़ा किले में खजाना गड़ा होने की सूचना अखबारों में पढ़ने के बाद तीनों को जानकारी हुई। बकौल वीर प्रताप, उनकी तो पहले इच्छा थी कि जो खजाना मिले वह राव साहब के वंशजों को मिले लेकिन लोगों की राय के बाद वह चाहते हैं कि जो भी खजाना निकले उससे पहले उनके वंशजों द्वारा बनवाई गई संपत्तियों का का पुनर्निर्माण हो। इसके बाद गांव में विकास की गंगा बहाई जाए। उनका कहना है कि इसके लिए वह जल्द ही जिलाधिकारी से मिलेंगे और उनसे एक समिति गठित करने की मांग करेंगे। वीर प्रताप के अनुसार, समिति में गांव के प्रबुद्ध जनों, वंशजों व प्रशासनिक अफसरों को शामिल किया जाए। समिति के सदस्यों के सामने ही खुदाई हो।
अभयचंद्र से शुरू हुआ वंश
इतिहास के जानकारों की मानें तो 13वीं शताब्दी में राजा अरगन का राज्य था। एक दिन राजा अरगन की रानी व पुत्री बक्सर घाट स्नान करने जा रही थी। तभी कुछ आततायियों ने रानी को उठा लिया था। पुत्री को उठाने पहुंचे तो उसने शोर मचा दिया। उस समय अभयचंद्र व निर्भयचंद्र मां चन्द्रिका देवी की पूजा अर्चना कर रहे थे। शोर सुनकर दोनों आततायियों से भिड़ गए और लड़की को बचा लिया। इसमें निर्भय चंद्र मारे गए। मामले की जानकारी होने पर राजा अरगन ने अभयचंद्र की वीरता से प्रसन्न होकर अपनी पुत्री का विवाह उनके साथ कर दिया और दहेज में कई महल व काफी धन दिया। राव राम बक्स सिंह उन्हीं अभयचंद्र के वंशज थे।