वाराणसी। शहर भर में सीवर डालने के लिए की गई खुदाई से पेयजल की लाइनें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। बारिश के दिनों में उमस के चलते जीवाणु और विषाणु तेजी से पनपते हैं। चिकित्सकों की चिंता है कि ऐसे हालात में शहर में दूषित जलापूर्ति कहर ढा सकती है। वायरल फीवर, पीलिया और डायरिया जैसी बीमारियों का प्रकोप बढ़ने की आशंका है। ऐसे में चिकित्सक जल को शोधित करके और उबाल कर पीने की सलाह दे रहे हैं। गर्भवती महिलाओं के लिए एहतियात और भी जरूरी है क्योंकि उनको एंटीबायोटिक दवाएं तथा दर्द निवारक औषधियां आसानी से नहीं दी जा सकती हैं।
अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. ओपी तिवारी ने बताया कि बारिश के दिनों में उमस के कारण वायरस और बैक्टीरिया ज्यादा पनपते हैं। हवा और पानी के माध्यम से संक्रमण एक से दूसरे स्थान पर पहुंचता है। बीमारियों का सबसे बड़ा कारक पानी है। वायरल फीवर, डायरिया, पीलिया जैसी बीमारियां आमतौर पर इस मौसम में होती हैं। इस मौसम में पसीना आसानी से नहीं सूखता है, लिहाजा त्वचा के संक्रमण की भी आशंका बनी रहती है। हवा के माध्यम से गले और छाती के संक्रमण फैलते हैं। बारिश में ज्यादा भींगने, कटे फल, सब्जियां और बासी भोजन के सेवन से बचना चाहिए। पानी उबाल कर या आरओ से शोधित करके ही पीना चाहिए। जलभराव होने पर मच्छर पनपने लगेंगे। उसके बाद मलेरिया, फाइलेरिया, डेंगू जैसी बीमारियों का प्रसार होने लगता है। ऐसे में मच्छरों से बचाव जरूरी है।
स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. ऋतु गर्ग के मुताबिक गर्भवती महिलाओं को इस मौसम में ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए। ऐसा नहीं कि उनको अलग से कोई बीमारी होती है। बीमार होने पर इलाज करने में दिक्कत ज्यादा होती है क्योंकि गर्भावस्था में एंटीबायोटिक और दर्द निवारक दवाएं नहीं दी जा सकती हैं। किसी को यदि मोच आ जाए या दर्द हो तो उसे खुद कोई दर्द निवारक लेने के बजाय चिकित्सक से सलाह अवश्य लेना चाहिए।