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तटवर्ती गांवों में बाढ़ ने बढ़ाईं दुश्वारियां

Varanasi Updated Mon, 05 Aug 2013 05:34 AM IST
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चिरईगांव/चौबेपुर/आराजीलाइन। गंगा के तटवर्ती गांवों में बाढ़ से जूझ रहे लोगों का संकट गहराता जा रहा है। न चिकित्सा सुविधाएं मिल रही हैं और न भोजन के पैकेट। गेंहू और चावल का कुछ जगहों पर वितरण किया गया है। राहत के नाम पर अबतक पर्याप्त पहल न होने से लोग चिंतित हैं। सबसे अधिक मुसीबत बढ़ी है ढाब क्षेत्र के लोगों की। वहां खेत डूबने से पशुओं के चारे की समस्या पैदा हो गई है।
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गंगा के अलावा नाद और गोमती से लगे बाढ़ग्रस्त इलाकों की दशा दिन पर दिन बिगड़ती जा रही है। चौतरफा पानी से घिरे पिपरी गांव के लोगों का रविवार को भी पलायन जारी रहा। यहां प्रधान की ओर से नाव चलवाई जा रही है। प्रभावित गांव में राजस्व विभाग की टीम का अबतक अतापता नहीं है। तटवर्ती इलाके की सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न हो चुकी है। बाढ़ प्रभावित मोकलपुर, रमचंदीपुर, गोबरहा,रामपुर, मुस्तफाबाद, चांदपुर, सिंहवार, छितौना, रामपुर नई बस्ती, जाल्हूपुर, अंबा, शिवदशा में प्रशासन की ओर से किसी तरह की राहत नहीं दी गई है। प्रशासन की ओर से लगाई गई दर्जन भर नावों की मदद से लोग सुरक्षित स्थानों के लिए रवाना हो रहे हैं। नायब तहसीलदार जाल्हूपुर जय श्रीराम के मुताबिक शिवदशा में छह, मोकलपुर में दो रामपुर में एक, गोबहरा में दो, मुस्तफाबाद सोता पर तीन और चांदपुर में दो नाव लगाई गई है। रामपुर विद्यालय पर शरण लिए परिवारों को 25-25 किलो चावल और गेहूं का वितरण किया गया। आराजीलाइन इलाके के शाहंशाहपुर में बाढ़ का पानी घुसने से फसलें जलमग्न हो गई हैं। ज्वार, बाजरा, मक्का के अलावा मिर्च और टमाटर की नर्सरी भी डूबने से किसानों को तगड़ा झटका लगने की आशंका है। किसान विद्यालय समिति के उपाध्यक्ष डॉ. कमलेश्वर सिंह ने क्षति का आकलन कराकर प्रशासन से मुआवजा दिलाने की मांग की है।
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