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गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष मुन्नन महाराज का निधन

Varanasi Updated Fri, 09 Aug 2013 05:34 AM IST
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वाराणसी। गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सत्येंद्र कुमार मिश्र उर्फ मुन्नन महाराज का गुरुवार की सुबह बीएचयू अस्पताल में निधन हो गया। वे 62 वर्ष के थे। सीने में संक्रमण के चलते मुन्नन महाराज तीन अगस्त से अस्पताल के स्पेशल वार्ड में भर्ती थे। निधन की जानकारी मिलते ही अंतिम दर्शन के लिए शुभेच्छुओं, मित्रों और रिश्तेदारों का तांता लग गया। रात में हरिश्चंद्र घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। मुखाग्नि उनके पुत्र सुशांत मिश्र ने दी। उनकी अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
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करीब चार महीने से बीमार चल रहे मुन्नन महाराज को सीने में संक्रमण के बाद बीएचयू अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके पुत्र सुशांत ने बताया कि सीने में संक्रमण इस कदर फैल गया था कि वो पानी तक नहीं घोंट पा रहे थे। उनके पार्थिव शरीर को दशाश्वमेध घाट स्थित उनके आवास राम मंदिर लाया गया। विधायक श्यामदेव रायचौधरी के अलावा, डॉ. दयाशंकर मिश्र दयालु, गंगोत्री सेवा समिति के अध्यक्ष पं. किशोरी रमण दुबे बाबू महाराज, तीर्थ पुरोहित सभा के महामंत्री पं. कन्हैया त्रिपाठी, पं. नारायण गुरु, विनोद कुमार निषाद, समेत तमाम लोगों ने घर पहुंचकर श्रद्धांजलि दी। वे अपने पीछे पत्नी मीनाक्षी मिश्रा, पुत्र सुशांत तथा तीन ब्याहता पुत्रियों का भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं।

इनसेट
सक्षिप्त रूप में हुई गंगा आरती
वाराणसी। गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष मुन्नन महाराज के निधन के कारण गुरुवार की शाम दशाश्वमेध और शीतला घाट पर होने वाली विख्यात गंगा आरती सिर्फ संक्षिप्त रूप में हुई। दोनों जगह केवल कपूर से मां गंगा की प्रार्थना की गई। शोक में दशाश्वमेध की दुकानें भी बंद रहीं।
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दो दशक पहले छेड़ी थी गंगा आरती को विस्तार देने की मुहिम
वाराणसी। गंगा आरती के जरिए दशाश्वमेध घाट को पर्यटन मानचित्र पर उभारने में मुन्नन महाराज के योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। उनकी मेहनत के बल पर घाट की एक आरती की लौ की महज दो दशक में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बन गई। उनके प्रयासों से देव दीपावली पर वायु सेना के हेलीकाप्टर से हुई पुष्पवर्षा के मोहक क्षण कभी नहीं भूलेंगे।
दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती सबसे पहले मुन्नूलाल पांडेय उर्फ रगुल महाराज ने शुरू की थी। शीतला घाट पर बाबू महाराज भी सुबह शाम गंगा आरती करते थे। इसके बाद घाट की गंगा आरती को मुन्नन महाराज ने बढ़ाने का संकल्प लिया। एक से तीन, फिर पांच और सात के बाद 21 देव कन्याओं और नेपाली तीर्थपुरोहतों की मदद से विशेष पर्वों, अवसरों पर गंगा आरती कराकर उन्होंने बनारस की शाम को रोजाना के उत्सव में तब्दील कर नई पहचान दी। अब देश-दुनिया के कोने-कोने से आने वाले पर्यटक की प्राथमिकता होती है कि वह दशाश्वमेध की गंगा आरती जरूर देखे। गंगा सेवा निधि ट्रस्ट की ओर से हनुमान यादव ने बताया कि दो दशक पहले मुन्नन महाराज ने घाट की गंगा आरती को बृहद रूप देना शुरू किया था। अब यह आरती अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्सव के रूप में तब्दील हो चुकी है।
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