वाराणसी। महापौर रामगोपाल मोहले ने शहरी विकास मंत्रालय द्वारा स्थानीय निकायों के सशक्तिकरण एवं नवीनीकरण पर आयोजित सम्मेलन में शहर की विकास योजनाओं में अनियमितताओं की पोल पट्टी खोली। जायका के तहत शहर में 650 करोड़ रुपये से कराये जा रहे विकास कार्यों में अनियमितता का आरोप मढ़ा। कहा कि इस योजना में सामुदायिक शौचालय के लिए 20.7 करोड़, धोबीघाट के लिए 5.37 करोड़, घाट सुधार योजना में 1.37 करोड़ और जन सहभागिता के लिए 4.75 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इन योजनाओं में क्या हुआ और क्या हो रहा है इसकी कोई सूचना ना तो उन्हें दी गई और ना ही नगर निगम सदन को। योजनाओं में जनप्रतिनिधियों का सुझाव तक नहीं लिया गया।
कहा कि योजनाएं ऐसे अधिकारी बना रहे हैं जिन्हें वाराणसी के सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और भौगोलिक समझ नहीं के बराबर है। जेएनएनयूआरएम के तहत शहर में वर्ष 2008 से चल रही विकास योजनाओं में महापौर और नगर निगम सदन की कोई भागीदारी नहीं होने पर भी आपत्ति की। जेएनएनयूआरएम की संपूर्ण योजनाओं की धनराशि नगर निगम को कर्ज के रूप में दी गई हैं जिसकी भरपाई टैक्स के रूप में भविष्य में शहर की जनता करेगी। उन्होंने महानगरों के विकास में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के अधिकारों में वृद्धि और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की पैरवी सम्मेलन में की। कहा कि 74वें संविधान संशोधन पर सरकारों द्वारा अमल नहीं कराने से महानगरों में नागरिक सुविधाओं की स्थिति बदतर बनी है। यहां तक कहा कि शहर में पर्यटन विकास की असीम संभावनाएं हैं लेकिन पर्यटन विकास के लिए बनी सारी योजनाएं अफसरशाही की भेंट चढ़ गईं। आरोप लगाया कि हाल ही में पर्यटन मंत्रालय द्वारा विकास योजनाओं पर चरचा के लिए आहूत बैठक में प्रशासनिक अफसरों को बुलाया गया लेकिन महापौर को नहीं बुलाकर जनप्रतिनिधियों का खुला अनादर किया गया है। 26 और 27 अगस्त को दिल्ली में आयोजित सम्मेलन में शिरकत कर लौटने पर महापौर ने अमर उजाला से बातचीत में उपरोक्त बातें बताई।