रोहनिया। सीबीएसई बोर्ड के विद्यार्थियों के लिए प्राब्लम साल्विंग असेसमेंट (पीएसए) की व्यवस्था शुरू की गई है। इसका उद्देश्य उनकी बौद्धिक क्षमता को विकसित करना है। इसके बेहतर परिणाम भी सामने आए हैं। अब यह जिम्मेदारी शिक्षकों की है कि वे छात्र-छात्राओं के बौद्धिक विकास पर विशेष ध्यान दें। ये बातें सीबीएसई बोर्ड के रीजनल ऑफिसर पीयूष शर्मा ने कहीं। वह शनिवार को वाराणसी सहोदय स्कूल कांप्लेक्स की ओर से डीपीएस वाराणसी में आयोजित शिक्षारत्न सम्मान दिवस 2013 में बतौर मुख्य अतिथि भाग लेने आए थे।
उन्होंने कहा कि पीएसए को और गुणवत्तायुक्त एवं सरल बनाया जाएगा ताकि विद्यार्थियों बौद्धिक विकास में कोई रुकावट न आए। उन्होंने समारोह में उपस्थित शिक्षक-शिक्षिकाओं को बच्चों और अभिभावकों के साथ तालमेल बैठाकर सहज एवं सरल तरीके से अच्छी शिक्षा देने के लिए कहा। इस मौके पर उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में सराहनीय योगदान के लिए सीबीएसई बोर्ड के विभिन्न विद्यालयों के 20 शिक्षक-शिक्षिकाओं को शिक्षा रत्न सम्मान प्रदान किया। इससे पूर्व उन्होंने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। वहीं, विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने बेहतरीन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से खूब वाहवाही लूटी। विशिष्ट अतिथि महिला महाविद्यालय, बीएचयू की प्राचार्य डॉ. मीना सोढ़ी थीं। प्रधानाचार्य आरके पांडेय ने अतिथियों का स्वागत एवं धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन तान्या जयकृष्णन ने किया।