वाराणसी। पावर ट्रांसमिशन के क्षेत्र में रिसर्च करने के लिए बीएचयू आईआईटी और पावरग्रिड कारपोरेशन के बीच शनिवार को समझौता हुआ। समझौता पत्र पर बीएचयू के कुलपति डा. लालजी सिंह और पावरग्रिड कारपोरेशन के चेयरमैन सह प्रबंध निदेशक आरएन नायक ने हस्ताक्षर किया। पावरग्रिड पूर्वांचल के गांवाें में गन्ने का अवशिष्ट जलने से धुएं से निकलने वाले कार्बन से प्रभावित होने वाले ट्रांसमिशन का स्थाई समाधान चाहता है। इस मसले पर बीएचयू आईआईटी के विशेषज्ञ शोध करेंगे।
पावरग्रिड के अधिकारियाें के मुताबिक पावर ट्रांसमिशन में कई कारणाें से अवरोध उत्पन्न होता है जिससे काफी बिजली बेकार हो जाती है। यदि शोध के जरिये इनके कारण और निवारण के उपाय ढूंढ लिए जाएं तो कीमती ऊर्जा की बचत की जा सकती है। पूर्वांचल के गांवाें में गन्ने के अवशिष्ट (बाईप्रोडक्ट) को जलाने से निकलने वाले धुएं से भारी मात्रा में कार्बन निकलकर पावर ट्रांसमिशन करने वाले तार पर जमा हो जाता है जिससे ट्रांसमिशन प्रभावित होता है। पूर्वांचल में इस समस्या के स्थाई समाधान के लिए पावरग्रिड आईआईटी के विशेषज्ञाें से मदद लेना चाहता है। समझौता पत्र पर कुलपति के आवास पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर कुलसचिव प्रो. जीएस यादव, वित्त अधिकारी अभय ठाकुर, आईएमएस निदेशक प्रो. आरजी सिंह, आईआईटी के निदेशक प्रो. राजीव संगल, कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. रवि प्रताप सिंह आदि मौजूद थे।