वाराणसी। मुहर्रम पर बनने वाले मन्नती ताजिए महंगाई की मार की जद में हैं। इनमें प्रयुक्त होने वाले सामानों के दामों में दोगुनी वृद्धि हो जाने से इनकी बिक्री में भी बढ़ोत्तरी हुई है। ताजिया बनाने वाले जी जान से इसके निर्माण में जुटे हैं, ताकि समय से इसकी बिक्री की जा सके।
जिले में करीब पांच सौ मन्नती ताजिए बिठाए जाते हैं अथवा उन्हें अन्य ताजियों के साथ कर्बला ले जाया जाता है। वाराणसी में लल्लापुरा और रामनगर में मन्नती ताजिए बनाए जाते हैं। दो फुट से लेकर 12 फुट तक बांस की खपच्चियों से तैयार किया जाता है। इन्हें बांधने के लिए नस का प्रयोग किया जाता है। जबकि सजाने में विभिन्न प्रकार के सजावटी कागजों का प्रयोग होता है। इसे बनाने की प्रक्रिया बकरीद के बाद से शुरू कर दी जाती है। नगर के साथ ही इसे आसपास के जिलों से लोग खरीदने आते हैं।
लल्लापुरा में डॉ. मुगीज के बगल में स्थित कब्रिस्तान में रहने वाले मुहम्मद अरशद बताते हैं कि उनका पूरा परिवार ताजिया निर्माण में जुट जाता है। लेकिन इस बार इनमें प्रयुक्त होने वाले सामानों में दोगुनी वृद्धि होने से ताजियों के दाम भी बढ़े हैं। बताया कि करीब पांच सौ परिवार ताजिया निर्माण से जुड़े हैं। चूंकि यह पुरखों की विरासत है, इसलिए बरकार है। मुहर्रम बाद परिवार अन्य कामों में लग जाता है।
इनसेट
सामान-पिछला मूल्य-बढ़ा मूल्य
बांस-100 रुपये प्रति पीस-200 रुपये प्रति पीस
बांस चिराई-200 रुपये-400 रुपये
नस-पांच रुपये प्रति पीस-बीस रुपये प्रति पीस
कागज-50 रुपये रिम-80 रुपये रिम
ताजिए के मूल्य में वृद्धि
ताजिया-पिछला मृल्य-बढ़ा मूल्य
12 फुट-3500 रुपये-4500 रुपये
छह फुट-400 रुपये-800 रुपये
तीन फुट-200 रुपये-400 रुपये
एक फुट-50 रुपये-100 रुपये