वाराणसी (ब्यूरो)। पूर्वोत्तर के राज्यों असोम, त्रिपुरा, मणिपुर एवं मिजोरम के हालात अच्छे नहीं हैं। यहां अलगाववादी और भारत विरोधी ताकतें तेजी से पांव फैला रही हैं। सरकार जहां बांग्लादेशी नागरिकों की घुसपैठ रोकने में नाकाम है, वहीं पूर्वोत्तर में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई अपना नेटवर्क फैला रही है। अरब के देशों से अलगाववादी ताकतों को फंडिंग के सबूत भी मिले हैं। इन सब के बावजूद राज्य और केंद्र दोनों ही सरकारें मौन हैं। यह कहना है अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य अपांग्शु शेखर शील का।
बता दें कि अपांग्शु बीते 10 साल से पूर्वोत्तर के राज्यों में संगठन का कामकाज देख रहे हैं। निवेदिता शिक्षा सदन में आयोजित एबीवीपी की राष्ट्रीय परिषद के तीसरे तीन दोपहर बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि घुसपैठ को लेकर राज्य और केंद्र सरकार, दोनों ही गंभीर नहीं हैं। सिर्फ असोम के कोकराझार जिले में प्रतिदिन छह हजार से अधिक बांग्लादेशी घुसपैठिए भारत में आ रहे हैं। सरकार और खुफिया तंत्र इस घुसपैठ को रोकने में पूरी तरह से नाकाम है। तुष्टिकरण का नतीजा है कि बीते 10 साल में आबादी का अनुपात मुस्लिमों के पक्ष में बढ़ा है। पूर्वोत्तर में इस समय 33 फीसदी मुस्लिम आबादी है जबकि 60 फीसदी लोग हिंदू हैं। दस साल पहले यह आंकड़ा 28 और 67 का था। आईएसआई का नेटवर्क पूरे पूर्वोत्तर में फैल चुका है। खाड़ी के देशों से अलगाववादी ताकतों को फंडिंग हो रही है। एक अन्य राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सीमांत्रो दास ने कहा कि असोम की सभ्यता और संस्कृति भी खतरे में है। पिछले दिनों असोम विधानसभा में यूडीएफ के विधायकों ने जिस ढंग से लुंबी और टोपी को असोम का रीजनल ड्रेस बनाने की मांग की, वह खतरनाक संकेत है। इस साल बांग्लादेशी घुसपैठियों की संख्या 50 लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है। मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा जैसे राज्यों से हिंदू पलायन कर रहे हैं।