वाराणसी। हालात पर रोते रहने वाले बहुतेरे मिलते हैं, लेकिन उसे सुधारने के लिए कदम बढ़ाने वाले मिसाल बन जाते हैं। कुछ ऐसा ही कर बौलिया की एक तंग गली के 20 मकानों में रहने वाले दो सौ लोगों ने व्यवस्था और समाज को आईना दिखाया है। सभी ने 150 मीटर की गली को श्रमदान से बनाने की शुरुआत की है।
लगभग नौ साल पहले नगर निगम ने बौलिया इलाके की सभी गलियों को ऊंचा किया और उसमें चौका बिछा दिया, लेकिन टीचर्स कालोनी के सामने वाली गली की हालत जस की तस छोड़ दी। नतीजतन यह गली मुख्य मार्ग से लगभग चार फुट नीचे हो गई। इससे बारिश के दिनों में इलाके का सारा पानी इसी गली में भरने लगा। क्षेत्रीय सभासद का ध्यान खींचने का भी कोई फायदा नहीं हुआ तो लोग खुद ही गली दुरुस्त करने में जुट गए हैं।
पिछले तीन दिनों से युवा ही नहीं, महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी सुबह घर से फावड़ा, टोकरी लेकर निकल पड़ते हैं। गली में मिट्टी डालते हैं और उसे चौरस करते हैं। लोगों ने गली को लगभग ढाई फुट तक ऊंचा कर दिया है। गली के निवासियों में रोज कमाकर खाने वालों की संख्या ज्यादा है। फिर भी मिट्टी खरीदने के लिए उन्होंने आपसी चंदे से कुल 10 हजार रुपये जुटाए हैं। पैसे खत्म होने को है पर हौसला कायम है।
गली में रहने वाले सिपाही रमाशंकर सिंह का कहना है कि गली में कोई प्रभावशाली या धनवान व्यक्ति नहीं है। चंदे से जितनी रकम जुट रही है, उससे काम कर रहे हैं। अमर कुमारी के पति दिहाड़ी मजदूर हैं। काम से लौटने के बाद पति-पत्नी दोनों श्रमदान कर रहे हैं। बीटेक के छात्र रीतेश कुमार यादव ने बताया कि क्षेत्रीय सभासद अजय कुमार से कई बार संपर्क किया लेकिन उन्होंने कहा कि जिसको वोट देते हैं उसी से गली बनवाने को कहिए। वहीं, सभासद का कहना है लहरतारा बड़ा और अविकसित वार्ड है। यहां की सभी समस्याओं का निस्तारण एक साथ नहीं हो सकता। बारी-बारी से समस्याओं को देख रहा हूं। मैंने किसी से यह नहीं कहा कि उसने वोट नहीं दिया है, इसलिए उसके इलाके में काम नहीं कराया जाएगा।