वाराणसी। करोड़ों रुपये खर्च के बाद भी जहां गंगा निर्मलीकरण की दिशा में सरकारी प्रयास नाकाफी साबित हुए हैं। वहीं, काशी में इसके लिए शुरू की गई आम आदमी की पहल अब रंग लाने लगी है। दो साल पहले पक्के महाल से गिनती के लोगों ने गंगा सफाई के लिए खुद फावड़ा-खंचिया उठाने की पहल की थी, अब उस अभियान से सैकड़ों लोग जुड़ गए हैं। रविवार की सुबह इसकी बानगी साफ दिखी। घर-घर से निकले इस टीम के सदस्यों ने सात घाटों से कचरे की सफाई की।
नेपाली खपड़ा निवासी महेश नवलगढि़या और ब्रह्मनाल के नरेश मेहरा और रमेश पांडेय ने मिलकर दो साल पहले मां गंगा रक्षाम सेवा समिति का गठन घाटों की सफाई के लिए किया था। तब ये तीन लोग ही घरों से फावड़ा-खंचिया लेकर निकलते थे। अब गंगा सफाई के नाम पर इस संगठन से जुड़ने वालों की तादाद सौ से अधिक हो गई है। घाटों पर रोज गंगा स्नान करने वाले नेमी भी इस अभियान से प्रेरित होकर सचेत रहे हैं। इतना ही नहीं, पक्के महाल से बढ़कर शहर के महमूरगंज, बिरदोपुर तक के लोग अब इस अभियान से जुड़कर सफाई में शामिल होने लगे हैं। रविवार की सुबह सौ से अधिक लोग मणिकर्णिका घाट पर सुबह आठ बजे पहुंचे। वहां से सिंधिया घाट, संकठा घाट, भोसला घाट, रामघाट, पंचगंगा घाट और बूंदी परकोटा तक लोगों ने सफाई की। इस दौरान, सात बोरा से अधिक निर्माल्य छानकर गंगा पार रेती में दबाया गया। समिति के अध्यक्ष महेश नवलगढि़या ने बताया कि अब घाट पर स्नान करने वाले नेमी भी सहयोग करने लगे हैं। यह अभियान हफ्ते में एक दिन चलाया जा रहा है।
इनसेट
गंगा की बीच धारा में बहा रहे हैं निर्माल्य
वाराणसी। गंगा में विसर्जित किए जाने वाले निर्माल्य को छानने के लिए तैनात निगम के कर्मचारियों ने लापरवाही की हद पार कर दी है। किनारे से निर्माल्य छानने के बाद उसे मध्य धारा में ही निगम कर्मी बहा दे रहे हैं। इस वजह से वह निर्माल्य दोबारा घाटों पर ही आकर लग जा रहा है। मां गंगा रक्षाम सेवा समिति के मनीष कपूरिया, लवकुश विश्वकर्मा ने बताया कि हर रोज निगम के कर्मी निर्माल्य बीच धारा में बहा रहे हैं। जांच कराकर इस पर रोक लगाई जानी चाहिए।