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तबले की थाप और कथक की थिरकन बनी यादगार

Varanasi Updated Wed, 05 Feb 2014 05:43 AM IST
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वाराणसी। पद्म विभूषण पं. किशन महाराज की स्मृति में मंगलवार की शाम कबीरचौरा स्थित सरस्वती कक्ष में वादन और नृत्य के संगम में संगीत प्रेमी नहाकर धन्य हो उठे। इस संगीत संध्या में तमाम विदेशी संगीत प्रेमी भी पहुंचे थे।
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सरस्वती प्रतिमा की पूजा के बाद काशी के कलाकारों ने पं. किशन महाराज के चित्र पर माल्यार्पण किया। शाम करीब साढ़े सात बजे शुरुआत हुई पं. सामता प्रसाद मिश्र गोदई महाराज के पुत्र कैलाश मिश्र के स्वतंत्र तबला वादन से। उठान के बाद टुकड़ा, रेला, बाट, तिहाई और परन की प्रस्तुति से उन्होंने फिजा बदल दी। हारमोनियम पर आनंद मिश्र ने लहरा दिया। इनके बाद डॉ. प्रेम किशोर मिश्र का सितार वादन हुआ। राग वागेश्वरी में अलाप, जोड़ झाला के बाद विलंबित और द्रुत गतें उन्होंने बजाईं। तबले पर कुबेर नाथ मिश्र ने संगत की। अंत में स्विटजरलैंड से आई फाइनी मारके और विशाल कृष्ण ने कथक नृत्य पर बेजोड़ युगलबंदी पेश की। पारंपरिक शैली में नृत्य के बाद इस जोड़ी ने कई प्रयोग किए। तबले पर राममिश्र, कुशाल कृष्ण, गायन- शक्ति मिश्र, सारंगी पर अनीश मिश्र ने संगत की। इससे पहले कलाकारों का स्वागत नरेंद्र मिश्र और अंजलि मिश्रा ने किया।
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