वाराणसी। ऊबड़-खाबड़ सड़कों, बूंदाबांदी और सड़क पर रोड़ों के बावजूद युवाओं की टोली हर-हर महादेव का घोष करती हुई नंगे पांव पंचक्रोशी यात्रा पर निकली। यात्रा का सिलसिला रात आठ बजे से शुरू हो गया और मंदिर का पट बंद होने तक श्रद्धालु दर्शन करके और संकल्प लेकर यात्रा पर रवाना होते रहे।
मणिकर्णिका घाट पर स्नान के बाद श्रद्धालु काशी विश्वनाथ मंदिर में आए। व्यास पीठ पर संकल्प लेकर यात्रा की शुरुआत की। मणिकर्णिका से घाटों के सहारे भक्त अस्सी घाट तक पहुंचे। वहां से कंदवा, भीमचंडी, रामेश्वर, पांचों पंडवा, कपिलधारा और फिर घाटों के सहारे मणिकर्णिका घाट होते हुए व्यास पीठ तक पहुंचेंगे। लगभग 85 किलोमीटर लंबे पंचक्रोशी मार्ग पर शिवपुर से कपिलधारा तक खुदाई के चलते रास्ते में जगह-जगह रोड़ा और पत्थरों से होकर श्रद्धालुओं को गुजरना पड़ा। पांवों में छाले पड़ गए लेकिन उनको जोश में कोई कमी नहीं दिखाई दी। हर-हर महादेव, बम-बम भोले का घोष करते हुए युवाओं की टोली बाबा के दरबार की ओर बढ़ती रही। चिरईगांव संवाददाता के मुताबिक कपिलधारा में गांव के सफाई कर्मियों के निर्वाचन ड्यूटी में होने के कारण देर रात तक सफाई नहीं हो पाई हालांकि सहायक विकास अधिकारी पंचायत रामजी पांडेय ने बताया कि भोर में सफाई के लिए कर्मचारियोें की तैनाती की जाएगी।
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बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए लगी कतार
श्रद्धालुओं से पट गईं शहर की गलियां और घाट
अमर उजाला ब्यूरो
वाराणसी। महाशिवरात्रि पर बाबा विश्वनाथ का दर्शन-पूजन करने के लिए देश के कोने-कोने से भक्तों का कारवां काशी में उमड़ पड़ा है। श्रद्धालुओं की टोलियां हर-हर, बम-बम का घोष दशाश्वमेध घाट और गोदौलिया क्षेत्र में पहुंचती रहीं। चितरंजन पार्क, दशाश्वमेध और आसपास के घाटों की सीढि़यां, मंदिर के दालान और दुकानों के छज्जे बुधवार की रात श्रद्धालुओं से पटे गए। बैरिकेडिंग में आधी रात के बाद दर्शन करने वालों की लंबी कतार लग गई और मंगला आरती के बाद भोर सवा तीन बजे से दर्शन शुरू हो गया।
बाबा विश्वनाथ की झलक पाने के लिए दोपहर से ही भक्तों की भीड़ उमड़ने लगी थी। शाम तक धर्मशालाओं, मठों, मंदिरों और अतिथिगृहों में खाली जगह नहीं बची। चितरंजन पार्क में भी साजो-सामान के साथ बिहार, मध्यप्रदेश, झारखंड आदि कई राज्यों के श्रद्धालुओं ने शाम को ही डेरा डाल दिया। गोदौलिया से चौक के बीच के सारा क्षेत्र हर-हर महादेव से गुंजायमान हो गया। भक्तों की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने महाशिवरात्रि स्थान के लिए दशाश्वमेध, शीतला घाट, अहिल्याबाई घाट, प्रयाग घाट, राजघाट, प्रह्लाद घाट पर बैरिकेडिंग करा दी, ताकि दूर-दराज से आने वाले भक्त अनजाने में गहरे प्रवाह में न जाने पाएं। प्रमुख स्नान घाटों पर गोताखोर भी नावों पर लगाए गए हैं। उधर, रात नौ बजे के बाद भी मंदिर जाने वाली सड़कों पर भक्तों की भीड़ बढ़ने लगी। रात में बूंदाबादी के बावजूद आधी रात के बाद बांस फाटक और चौक से छत्ताद्वार के बीच कतारें लग गई थीं।
सेवापुरी संवाददाता के अनुसार रामेश्वर में शिवरात्रि की पूर्व संध्या पर शिव पार्वती की भव्य झांकी निकाली गई। झांकी के रामेश्वर स्थित महादेव मंदिर पहुंचने पर महंत राममूर्ति दास ने झांकी की आरती उतारी। इस दौरान उमाकांत त्रिपाठी और ग्राम प्रधान गोपाल चौरसिया ने झांकी का स्वागत किया।
इनसेट
230 टिकट मंगला आरती के लिए जारी
वाराणसी। मंगला आरती के लिए देर शाम तक 230 टिकटों की बिक्री हुई। इसके बाद काउंटर से टिकट देने पर रोक लगा दी गई।
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बंदरों से सजावट की हिफाजत के लिए गुलेलधारी तैनात
वाराणसी। महाशिवरात्रि पर देवाधिदेव बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर की फूलों से सजावट की गई है। बंदरों से सजावट की हिफाजत के लिए चिडि़या मारने वाली गुलेल के साथ युवकों को रात नौ बजे के बाद छतों पर तैनात कर दिया गया।
पहली बार न्यास परिषद ने मंदिर के कोष से पांच हजार गेंदे की माला, गुलाब, रजनीगंधा, आर्किड आदि फूलों से मंदिर की सजावट कराई है। दोपहर में 30 से अधिक कारीगर सजावट करने लगे तो बंदरों ने फूल नोंचना शुरू कर दिया। इसकी सूचना मिलने पर मुख्य कार्यपालक अधिकारी एसके मौर्या ने 15 गुलेलधारी कर्मियों की तैनाती मंदिर की छतों पर कराने का निर्देश उद्यान विभाग को दिया। दो पालियों में गुलेलधारी पहरेदार मंदिर की सजावट में लगे फूलों की रखवाली करेंगे। छत्ताद्वार को भी सजाया गया है। इसके अलावा सभी द्वारों पर कारीगरों ने मेट्रो गेट बनाए हैं। बैकुंठ महादेव परिसर से रानी भवानी तक झूमर और बुके लगाकर सजावट की गई है। उद्यान निरीक्षक सुधांशु सिंह ने बताया कि रात की पाली में 10 और दिन में पांच कर्मचारी बंदरों से सजावट की हिफाजत करेंगे।