वाराणसी। आईएमएस को बीएचयू से अलग एम्स बनाने की मांग लेकर जूनियर डाक्टरों की हड़ताल का दायरा और बढ़ गया। सीनियर डाक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ भी हड़ताल में शामिल हो गया है। हालांकि हड़ताली डाक्टरों ने बुधवार को आईएमएस परिसर में समानांतर ओपीडी चलाकर मरीजों को देखा। इस बीच रेजिडेंट डाक्टरों ने क्रमिक अनशन भी शुरू कर दिया है। उधर, दो दिन पूर्व अस्पताल में तोड़फोड़ करने वाले एक रेजिडेंट डाक्टर को पुलिस ने बुधवार सुबह गिरफ्तार किया। बाद में उसे निजी मुचलके पर छोड़ दिया गया। एक असिस्टेंट प्रोफेसर ने बीएचयू कुलपति पर तानाशाही और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया है। विवि प्रशासन ने सख्त रुख दिखाते हुए हास्टल खाली कराने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
सर सुंदरलाल चिकित्सालय की ओपीडी बुधवार को लगभग ठप रही। हालांकि अस्पताल की इमरजेंसी सेवाएं बहाल हो गई। रेजीडेंट्स और वरिष्ठ चिकित्सकों ने आईएमएस परिसर में समानांतर ओपीडी चलाई। उन्होंने एम्स का पर्चा बनवाकर उस पर ही दवाएं लिखीं। मरीज यही पर्चे लेकर डॉक्टरों तक पहुंचे। डाक्टरों ने खुले आसमान के नीचे ही टांके लगाए और काटे। आईएमएस परिसर में खुले आसमान के नीचे चल रही समानांतर ओपीडी में उन्होंने करीब 1500 मरीजों की जांच की और जरूरी दवाएं लिखीं।
दूसरी तरफ, आईएमएस के नेत्र रोग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. अभिषेक चंद्रा ने बिना कोई कारण बताए रजिस्ट्रार को अपना इस्तीफा सौंप दिया। पत्रकारों को बताया कि उन्होंने बीएचयू प्रशासन के भ्रष्टाचार के विरोध और रेजिडेंट डॉक्टरों के समर्थन में यह कदम उठाया है।
मामले में बीएचयू प्रशासन भी सख्त रुख दिखा रहा है। चीफ प्राक्टर प्रो. एके जोशी ने बताया कि चिकित्सकों को 24 घंटे पूर्व चेतावनी देने के बाद भी रेजिडेंट डाक्टर काम पर नहीं लौटे। वह अभी भी जिद पर अड़े हैं। उनसे बातचीत की कोशिश की जा रही है। छात्र नहीं माने तो कभी भी हास्टल खारी कराया जा सकता है।