वाराणसी। संकट मोचन के दरबार में पहली बार दो हस्तियों ने ड्रम और मेंडोलिन पर लय-ताल का अनूठा समन्वय प्रस्तुत कर संगीत प्रेमियों के दिल में नई जगह बनाई। जाने माने ड्रम वादक शिवमणि ने तो पानी के जार से लेकर गाल तक को बजाकर लोगों को चकित कर दिया। शंख और घुंघरू के साथ घंटे के स्वरों का समन्वय भी बेजोड़ था।
कोलकाता से आई सुरंजना बसु ने राग रागेश्री में अलापचारी की। विलंबित एकताल के बाद तीन ताल में निबद्ध बंदिश के बाद उन्होंने ठुमरी से विराम लिया। इनके बाद आए यू श्रीनिवास और यू राजेश के साथ ड्रम के महारथी शिवमणि ने लय-ताल के प्रस्फुटन से तूफान मचा दिया। संगीत प्रेमियों की खचाखच भीड़ के बीच शिवमणि ने 16 से अधिक वाद्यों पर ताल लगाए। पानी से भरे जार में घंटा, घुंघरू और तवे की टनटन की झनकार से अलग स्वर वातावरण को झंकृत कर रहे थे। तालियों की बौछार के साथ हर-हर महादेव के जयकारे गूंजते रहे। इनके बाद धारवाड़ से आए कैवल्य कुमार ने राग गोरख कल्याण में विलंबित एक ताल के बाद तीन ताल में निबद्ध बंदिश पेश की। इनके गायन में चैनदारी के साथ तैयारी का अनूठा समावेश था। तबले पर पुंडलीक कृष्ण भागवत, हारमोनियम पर दिनकर शर्मा ने संगत की। इनके बाद पुणे से आईं शहाना बनर्जी ने सितार पर राग ललित की अवतारणा की। अलाप, जोड़, झाला के बीद तीन ताल में गतकारी की। कोलकाता के अर्नव चटर्जी के गायन से तीसरी निशा ने विराम लिया। राग नट भैरव में बड़ा ख्याल के बाद छोटा ख्याल की प्रस्तुति सराही गई।