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मम्मी-पापा याद दिला रहे अच्छे नागरिक का कर्तव्य

Varanasi Updated Wed, 07 May 2014 05:30 AM IST
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केस वन - प्रो. जीतेंद्र तिवारी ने अपनी बेटियों के फेसबुक वॉल पर पोस्ट किया ‘प्लीज कम बैक टू होम फॉर वोटिंग’। उनकी बेटियां लखनऊ स्थित मेडिकल कालेज में पढ़ती हैं। मैसेज के जरिये उन्होंने अपनी बेटियों को प्रोत्साहित किया है कि वे अपने मताधिकार का प्रयोग जरूर करें और वोटिंग के लिए घर आ जाएं।
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केस टू - शहर के बाहर मेडिकल की पढ़ाई कर रहीं अपनी बेटी को अंजलि अग्रवाल ने 12 मई को वोटिंग के लिए घर बुला लिया है। बेटी को उन्होंने 11 मई से 14 मई तक चार दिन की छुट्टियां भी गिनाई हैं। कहा है कि पढ़ाई के साथ वो वोटिंग की जिम्मेदारी को जरूर निभाए।

केस थ्री - दिल्ली में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर काम कर रहे मोहित सिंह को उनके पापा ने फोन किया। कहा कि वोटिंग के लिए बाकायदा ऑफिस में छुट्टियां दी जा रही हैं, वो भी छुट्टी लेकर इस हॉट सीट पर वोटिंग करे। चाहे तो इसके लिए नौकरीशुदा बेटा उनसे आने-जाने का किराया तक ले ले।
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तबस्सुम
वाराणसी। होली और दीपावली जैसे पर्वों की तरह लोकतंत्र के इस महापवर् पर भी मम्मी-पापा अपनों को ऐसे ही शिद्दत से याद कर रहे हैं। कोई फोन पर बेटे-बेटियाें से घर आकर वोटिंग करने की गुजारिश कर रहा तो कोई सोशल मीडिया के जरिये उन्हें लोकतंत्र के प्रति उनकी जम्मेदारियों का अहसास करा रहा है। फेसबुक और वाट्सएप के जरिये तमाम लोग दूसरे शहरों में पढ़ाई या जॉब कर रहे बेटे-बेटियों को वोटिंग के लिए घर बुला रहे हैं।
भाजपा के पीएम कैंडिडेट नरेंद्र मोदी और आप संयोजक अरविंद केजरीवाल के चुनावी मैदान में उतरने से देश की सबसे हाईप्रोफाइल सीट बन चुकी वाराणसी में 12 मई को लोकतंत्र का महापर्व, यानी मतदान का दिन है। इस चुनाव में भागीदारी करने के लिए मम्मी-पापा बाहर पढ़ाई कर रहे, जॉब कर रहे अपने बच्चों को घर बुला रहे हैं। ख्वाहिश यही है कि उनके बच्चे भी अच्छे नागरिक होने का फर्ज निभाएं और अपने मताधिकार का प्रयोग जरूर करें। तमाम अभिभावक इसके लिए फेसबुक और वाट्सएप जैसी सोशल मीडिया साइट्स के जरिये बच्चों तक अपने मैसेज पहुंचा रहे हैं। इसके जरिये उनकी कोशिश यह भी है कि उनके बच्चोें के साथ ही दूसरे लोग भी इससे प्रेरणा ले सकें।

मिल जाए मिलने-जुलने का भी मौका
वोटिंग तो एक अहम जिम्मेदारी है ही, लेकिन इन सबके बीच मम्मी-पापा की ख्वाहिश वोटिंग के बहाने ही सही बच्चों से मिलने का भी है। वो भी तब जब वोटिंग के बहाने उन्हें लगातार चार दिन की छुट्टी बिताने का मौका मिल रहा हो। वाराणसी संसदीय सीट पर चुनाव तो पहले ही खास था लेकिन 12 मई को मतदान होने से कई और खासियतें इससे जुड़ गई हैं। 12 मई यानी सोमवार, वोटिंग की छुट्टी। फिर रविवार, 13 मई को मौला डे की छुट्टी और 14 मई को बुद्ध पूर्णिमा की। इन चार दिनों की छुट्टियों का हवाला देकर भी मम्मी-पापा अपने बच्चों को वोटिंग के बहाने घर बुला रहे हैं।
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