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तरकश से मोदी ने चुन-चुनकर चलाए तीर

Varanasi Updated Fri, 09 May 2014 05:30 AM IST
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वाराणसी। नरेंद्र मोदी ने रोहनिया की सभा में गुरुवार को खुद को किसानों, बुनकरों, गरीबों, बेरोजगारों के खेवनहार के रूप में पेश किया। कट्टर हिंदुवादी नेता की छवि के आरोपों से उबरने और गंगा-जमुनी तहजीब के शहर से दिल का नाता जोड़ने का उनका जुदा अंदाज लोगों का बरबस ध्यान खींच रहा था। भीड़ के बीच मंच पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस के करीबी कर्नल निजामुद्दीन का पैर छूकर बड़ों के सम्मान के प्रति अपनी परिपाटी जाहिर की तो शहनाई के जादूगर उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की गंगा के प्रति गहरी आस्था का बखान कर दूर की कौड़ी खेली। बेनिया बाग में भले ही उन्हें अपनी बात कहने के लिए मंच नहीं मिल सका, लेकिन अपने सधे तजुर्बे से मोदी एक ही सभा में पूरी कसर निकालने से नहीं चूके।
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करीब 103 साल की उम्र में चलने-फिरने में असमर्थ हो चुके कर्नल निजामुद्दीन को कुछ लोग गोद में उठाकर मंच तक ले गए। मोदी ने उनका पैर छूकर जब आशीर्वाद लिया तब भीड़ में खड़े लोग चेहरे का पसीना पोंछने के बजाए एक-दूसरे का मुंह देखने लगे। इसके बाद मोदी ने कर्नल को दुपट्टा ओढ़ाकर सम्मानित किया। उन्होंने आजाद हिंद फौज में रहने वाले कर्नल के 50 किमी दूर से मिलने आने पर जमकर तारीफ की। दो कदम आगे बढ़कर भरोसा दिलाया कि नेताजी सुभाष चंद और उनके साथियों ने देश के लिए जिन सपनों को लेकर जवानी खपाई थी, उसे पूरा करने में कसर नहीं छोड़ेंगे। इतना ही नहीं, अपने भाषण के दौरान दो बार उन्होंने भारतरत्न उत्साद बिस्मिल्लाह खां का नाम लेकर मुसलमानों को भी संदेश देने की कोशिश की वे उन्हें कितना चाहते हैं। मोदी ने तुलसी, कबीर का भी नाम लिया। यही नहीं, अनाज का समर्थन मूल्य देने का उनका नया फार्मूला अन्नदाताओं के चेहरे पर चमक लाने के लिए काफी था। टूरिज्म के जरिये बेरोजगारों को काम देने की बात हो या फिर बुनकरों की बेहतरी के तरीके, अपने तरकस से मोदी ने चुन-चुनकर ऐसे तीर चलाए जिससे काशी में उनको घेरने की विरोधियों की कोशिश पर पानी फिर जाए।
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